भारतीय बसही बार्डर का है इलाका, एसएसबी अधिकारियों के साथ एसडीएम ने किया मुआयना
भारत नेपाल के बसही बार्डर के पास नोमैंस लैंड पर एक नाले पर नेपाल के ह्यूम पाइप डाल कर रास्ता बनाए जाने की जानकारी मिलने पर अफरातफरी मच गई। एसएसबी ने इसको देखते ही काम रुकवा दिया और प्रशासनिक अधिकारियों को रिपोर्ट दी। जिस पर एसडीएम ने एसएसबी अधिकारियों के साथ मौका मुआयना किया। बताया गया है कि अब एक बार फिर से सीमांकन किया जाएगा और उसी के बाद यह तय होगा कि काम होगा या नहीं।
बसही बार्डर के पिलर संख्या 200 के पास नौमैंस लैंड पर एक नाला बह रहा है। इसको पारकर भारत आसानी से आया जा सकता है। इस नाले पर नेपाल ह्यूम पाइप डालने का कार्य कर रहा था। निरीक्षण के दौरान एसएसबी ने यह देखा तो काम रुकवा कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी। उच्चाधिकारियों ने हालात से प्रशासनिक अफसरों को अवगत कराया। डीएम ने संज्ञान लेते हुए एसडीएम शादाब असलम को मौके पर भेजा। वह एसएसबी के सहायक कमांडेंट सौरभ कुमार साथ गए और मौका देखा। देखा गया कि उक्त स्थान फिलहाल नोमैंस लैंड के अंतर्गत आ रहा है। मौके पर छह ह्यूम पाइप पड़े हुए थे। इसके बाद एसडीएम ने भी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी। फिलहाल काम रुका हुआ है। भारतीय और नेपाल अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में तय हुआ है कि 27 अगस्त को भारत नेपाल के अधिकारियों की एक बैठक होगी। इस बैठक में कमेटी का गठन होगा जो सीमांकन करेगी। इसमें दोनों देशों के अधिकारी शामिल होंगे। इसके बाद तय होगा कि यह किसका इलाका है और यहां काम हो सकता है या नहीं।
नेपाल मान रहा अपना इलाका
बताया गया है कि जहां ह्यूम पाइप डाले जा रहे हैं नेपाल उसे अपना इलाका मान रहा है। जब कि भारतीय प्रशासन के मुताबिक वह नोमैंस लैंड है। नोमैंस लैंड पर दोनों ही देश कोई भी निर्माण या कार्य ऐसे नहीं करा सकते। बता दें कि सालों पहले 200 नंबर पिलर ध्वस्त हो गया था और इसका वजूद मिट गया तो यहां पास ही में लगे एक पेड़ को पिलर माना गया था। इसके आधार पर निर्माण नोमैंस लैंड पर हो रहा है। फिलहाल गतिरोध बना हुआ है।
पिलर संख्या 200 के पास मैने मौका मुआयना किया है। मौके पर नाले के पास छह ह्यूम पाइप पड़े हुए हैं। निरीक्षण के वक्त कोई निर्माण नहीं हो रहा था, फिर भी प्रशासन की ओर से नेपाल प्रशासन को पत्र लिखा गया कि वह किसी निर्माण को न कराएं।
- शादाब असलम, एसडीएम, पलियाकलां
27 अगस्त को भारत नेपाल के अधिकारियों की एक बैठक होगी, जिसमें एक कमेटी का गठन किया जाएगा और इसमें दोनों देशों के अधिकारी शामिल होंगे। कमेटी मौके पर नाप करेगी। इसके बाद ही तय होगा कि यहां कार्य होगा या नहीं।
- कुमार राजीव रंजन, प्रभारी कमांडेंट, एसएसबी