केंद्रीय मंत्री के वकील के अवकाश पर जाने के कारण सुनवाई टली
प्रभात गुप्ता के भाई और हत्याकांड की पैरवी कर रहे राजीव गुप्ता ने बताया कि विपक्षी टेनी के वकील के 31 मई तक छुट्टी पर चले जाने की वजह से हाईकोर्ट की कोर्ट नम्बर एक में जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस सरोज यादव के सामने सुनवाई रुक गई। राजीव गुप्ता की ओर से सीनियर्स काउंसिल ज्योतेंद्र मिश्रा एवं सुशील सिंह ने डबल बेंच के सामने मुक़दमे को सुने जाने पर जोर दिया। जून में हाईकोर्ट में ग्रीष्म क़ालीन अवकाश होने के कारण डबल बेंच के जस्टिस ने 11 जुलाई 2022 की तारीख तय की है। अब अंतिम सुनवाई के लिये अदालत ने फिर 11 जुलाई की तारीख लगाई है। वहीं, लगातार तारीख बढ़ने से परिजन ने निराशा जताई है।
तिकुनिया कस्बे के 22 साल पुराने प्रभात हत्याकांड में मंत्री टेनी के खिलाफ हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में लगी सुनवाई मंगलवार को भी नहीं हो सकी। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के वकील के छुट्टी पर चले जाने की वजह से मंगलवार को भी मामले की सुनवाई टल गई।
डीजीसी ने चार आरोपियों के डिस्चार्ज एप्लीकेशन पर आपत्ति दाखिल की
तिकुनिया कांड मामले में मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालती सुनवाई शुरू हुई तो डीजीसी की ओर से चार आरोपियों के डिस्चार्ज एप्लीकेशन को बेबुनियाद बताते हुए उनके खिलाफ आपत्ति दाखिल की गई। डीजीसी अरविंद त्रिपाठी ने बताया कि सघन जांच के बाद पर्याप्त सबूतों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल हुआ है, जिसका संज्ञान लिया जा चुका है। इस स्तर पर अभियुक्तों को डिस्चार्ज नहीं किया जा सकता।
अपनी आपत्ति दाखिल करते हुए उन्होंने बताया कि आशीष मिश्र मोनू, आशीष पांडे, लवकुश राणा और सुमित जायसवाल के डिस्चार्ज प्रार्थना पत्रों पर पहले ही आपत्ति दाखिल की जा चुकी है। धर्मेंद्र बंजारा सहित चार आरोपियों के खिलाफ मंगलवार को आपत्ति दाखिल की गई है।
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ की ओर से प्रस्तुत किए गए अंकित दास, लतीफ उर्फ काले, सत्यम त्रिपाठी, नंदन सिंह बिष्ट सहित पांच आरोपियों के खिलाफ डिस्चार्ज प्रार्थना पत्रों पर शासकीय पक्ष से अभी आपत्ति नहीं तैयार हो सकी है, लिहाजा उन्हें आपत्ति दाखिल करने के लिए समय दिया जाए।
तिकुनिया मामले में अगली सुनवाई सात जून को
इस पर जिला जज मुकेश मिश्र ने लगातार हो रहे विलंब का जिक्र करते हुए नाराजगी भरे लहजे में शासकीय अधिवक्ता को 10 दिनों का समय दिया है और निर्देशित किया कि तय समय के भीतर ही इन प्रार्थना पत्रों पर शासकीय पक्ष रखा जाए। इस मामले में आरोप तय करने को लेकर निर्णायक सुनवाई सात जून को की जाएगी। वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश दुबे, अवधेश सिंह, राम आशीष मिश्र, चंद्र मोहन सिंह प्रमुख रूप से मौजूद रहे।