पलियाकलां। क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को कम खर्च में उच्च शिक्षा मुहैया कराने के लिए वर्ष 1999 में स्थापित श्री गुरुगोविंद सिंह जी महाराज राजकीय महाविद्यालय आज बदहाली के आंसू रो रहा है। जिस मकसद से इस कॉलेज की स्थापना हुई थी, वह शिक्षकों की भारी कमी के चलते पूरी तरह फेल होता नजर आ रहा है।
हालात यह हैं कि कॉलेज में शिक्षकों के न होने से छात्र-छात्राओं का मोहभंग हो गया है। इस सत्र में रिकॉर्ड स्तर पर सीटें खाली रह गईं। किसी समय इस महाविद्यालय का दबदबा ऐसा था कि यहां प्रवेश के लिए छात्र-छात्राओं की भारी भीड़ उमड़ती थी। कॉलेज प्रशासन को विश्वविद्यालय से हर साल सीटें बढ़वाने के लिए गुहार लगानी पड़ती थी लेकिन आज तस्वीर बिल्कुल उलट है।
इस वर्ष कला वर्ग की 420 सीटों के सापेक्ष महज 280 छात्र-छात्राओं ने ही प्रवेश लिया, जिससे 140 सीटें खाली पड़ी हैं। वाणिज्य वर्ग की स्थिति तो और भी भयावह है, जहां 120 सीटों में से केवल 27 सीटों पर ही दाखिले हुए हैं और 93 सीटें रिक्त रह गई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षकों के अभाव में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह लचर हो चुकी है। महाविद्यालय में पढ़ाई न होने की जानकारी जब छात्र-छात्राओं को मिलती है, तो वे मजबूरन दूर-दराज के महंगे निजी कॉलेजों का रुख कर रहे हैं। मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के बच्चों के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्हें या तो बिना शिक्षकों के इसी कॉलेज में भविष्य दांव पर लगाना पड़ रहा है या फिर कर्ज लेकर निजी संस्थानों की भारी-भरकम फीस भरनी पड़ रही है।
अगर यही स्थिति बनी रही और शासन-प्रशासन ने शिक्षकों की नियुक्ति पर ध्यान नहीं दिया, तो वह दिन दूर नहीं जब इस कॉलेज में छात्र संख्या शून्य की ओर पहुंच जाएगी। लाखों की आबादी वाले इस क्षेत्र के भविष्य के साथ हो रहा यह खिलवाड़ चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्नातक कला वर्ग में आठ पदों पर महज एक शिक्षक
महाविद्यालय में कला वर्ग में समाजशास्त्र, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, भूगोल, इतिहास, गृह विज्ञान, शारीरिक शिक्षा आदि विषय हैं। नियमानुसार इन सभी पदों पर शिक्षक नियुक्त होने चाहिए लेकिन इसमें महज संस्कृत के ही शिक्षक हैं। शेष सभी पर खाली हैं। वाणिज्य वर्ग में दो शिक्षक पद स्वीकृत हैं लेकिन इसमें भी महज एक पद पर ही शिक्षक की तैनाती है।
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निदेशालय से शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। इसके अलावा मंत्री सुरेश खन्ना से भी अनुरोध किया जा चुका है।
डॉ. सूर्यप्रकाश शुक्ला, प्राचार्य, श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज राजकीय महाविद्यालय