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खीरी में हो रहा लालसर पक्षी का शिकार

Tue, 27 Dec 2016 11:25 PM IST
विकास शुक्ला लखीमपुर खीरी।
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पक्षी - फोटो : अमर उजाला
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डीएफओ बोले, हर सरोवर की हो रही मॉनीटरिंग
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शिकारी मिले तो होगी सख्त कार्रवाई
मेहमान प्रवासी पक्षियों के संरक्षण को जहां वन महकमा सरोवरों के विकास पर लाखों रुपये खर्च कर रहा है, वहीं दो जुलाई को बर्ड वॉचिंग डे मना चुका है। महकमा प्रवासी पक्षियों को बचाने में लगा है, वहीं जिले में आने वाली लालसर और मुर्गाबी पक्षी का धड़ल्ले से शिकार हो रहा है। ऐसा भी नहीं है कि इसकी जानकारी महकमे को नहीं है, लेकिन इसके बाद भी अभी तक इन पक्षियों का शिकार करने वाला एक भी शिकारी नहीं पकड़ा गया। इससे लगता है कि वन कर्मचारियों की मिलीभगत से इन पक्षियों का शिकार हो रहा है। 
दक्षिण खीरी वन प्रभाग की वनरेंज गोला, मैलानी, मोहम्मदी के तालाबों और जलाशयों में विदेशी मेहमानों का आगाज हो चुका है, जिन्हें देखने को पक्षी प्रेमियों की भीड़ भी लग रही है। पक्षियों की संख्या बढ़ते ही इनका शिकार भी होने लगा है। एक जानकार ने अमर उजाला को नाम न छापने की शर्त पर पक्षियों के शिकार की बाबत बताया। शिकार के बाद मृत कुछ पक्षियों की फोटो भी उपलब्ध कराई। जानकारों का कहना है कि इस बार न सिर्फ शिकार बढ़ा है, बल्कि इन पक्षियों का रेट भी बढ़ गया है।
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बेहद चिंतनीय है पक्षियों को शिकार
पर्यावरण प्रेमी और इंडियन बर्ड कंजर्वेशन नेटवर्क (आईबीसीएन) के स्टेट को-ओर्डीनेटर डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि जिले में साइबेरिया से आने वाली लालसर पक्षी का अंग्रेजी नाम रेड क्रस्टडेेड पोचर्ड हैं। कुछ लोग इसे लेसर विशलिंग डेस्क भी कहते हैं। यह मुर्गाबी से मिलती जुलती चिड़िया है। जिले में लालसर और मुर्गाबी बहुतायत में आती हैं। इसके अलावा सुरखाब, ट्रामन पोस्टर्ड, सिनटेल आदि साइबेरियन पक्षी भी आते हैं। जिनका धड़ल्ले से शिकार होता है, जहां अत्यंत चिंतनीय है। उनका कहना है कि शिकारी इतना बेखौफ हैं कि वह जाल लगाकर भी पक्षियों का शिकार करते हैं।

इन स्थानों पर हो रहा शिकार
वनरेंज गोला की वीट रायपुर, रामनगर, सिकंदरपुर में उल्ल नदी, वन रेंज मैलानी में नगरिया ताल, मोहम्मदी के सेमरई जलाशय में प्रवासी पक्षी आ रहे हैं, जिनका धड़ल्ले से शिकार हो रहा है।

इस तरह होता है शिकार
जानकारों के अनुसार, प्रवासी पक्षियों को पहले फंदा लगाकर शिकार होता था, लेकिन शिकारियों ने ट्रेंड बदल दिया है। वह अब गेहूं और अन्य खाने वाले दानों में जहरीली दवा को मिलाकर पत्तों पर रख देते हैं। दाना चुगते ही तड़पकर पक्षी मर जाते हैं। इसको ताजा रखने के लिए शिकारी उसे सरोवर में ही पड़ा रहने देते हैं। जब ग्राहक आते हैं तो तालाबों और जलाशय से निकालकर एक पक्षी को एक सौ पचास रुपये के हिसाब से बेचते हैं। बताते तो यह भी हैं कि 50 रुपये वनकर्मी का होता है। यह शिकारी नये ग्राहक से चौंकते हैं पर पुराने से सीधे मिलकर उनसे पैसा लेकर पक्षियों को लाकर दे देते हैं।

रंजिश के भय में नहीं बोलते ग्रामीण
इलाके के लोग पक्षियों के शिकार की बाबत भलीभांति जानते हैं पर रंजिश के भय से वह खामोश रहने को विवश हैं।

14 मोर के शिकार की जांच भी ठंडे बस्ते में
दक्षिण खीरी वन प्रभाग की मैलानी रेंज की गदनियां बीट के जमुनिया ताल के उत्तर पश्चिम जंगल के किनारे चार दिसंबर को 14 मोर मृत मिले थे। इन मोर को शिकार होने की आशंका जताई जा रही थी। डीएफओ ने मामले की जांच कराने की बात कही थी, लेकिन आज भी मामले की जांच हो रही है। वन विभाग इस मामले में 22 दिन बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका।
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प्रवासी पक्षियों के शिकार की अपुष्ट जानकारी मिली है। शिकारियों को दबोचने के लिए सरोवरों की मॉनीटिरिंग भी कुछ स्थानों पर कर्मचारियों को तैनात किया गया है, लेकिन अभी तक कहीं कोई मामला नहीं पकड़ा गया। यदि पक्षियों का शिकार होता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- अखिलेश पांडे, डीएफओ-दक्षिण खीरी वन प्रभाग
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