बाघिन की तलाश में वन कर्मी छान रहे जंगल का चप्पा-चप्पा
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मझरा-खैरटिया क्षेत्र में विशेषज्ञों और स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एसटीपीएफ) के जवानों समेत 35 से अधिक वन कर्मियों की टीम अब तक हमलावर बाघिन का सुराग नहीं लगा सकी है। कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर से बाघिन को हटाने के निर्देश मिलने के बाद बाघिन की तलाश का अभियान और तेज हो गया है। बाघिन की तलाश में चार टीमें लगाई गई हैं। इसमें तीन टीमें पशु चिकित्सकों के नेतृत्व में बनाई गई हैं। इनके अलावा एसटीपीएफ के जवान तैनात किए गए हैं। वन मुख्यालय से कई वरिष्ठ अधिकारियों ने यहां डेरा डाल रखा है। लखनऊ चिड़ियाघर की ट्रैंक्युलाइजर टीम लगातार बाघिन की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
बाघिन को तलाश रहे दुधवा के चार हाथी
बाघिन की तलाश में दुधवा के चार हाथी जयमाला, चंपाकली, डायना और गंगाकली को लगाया गया है। जो टीमें बनाई गई हैं उनमें पहली टीम डॉ. खनिन के नेतृत्व में बनाई गई है। इसमें गिरिजापुरी के एसडीओ अमित सिंह भी शामिल हैं। दूसरी टीम दुधवा के डॉ. दया शंकर के नेतृत्व में है। इसमें कतर्निया घाट के प्रभारी रेंजर राम कुमार (द्वितीय) को शामिल किया गया है। तीसरी टीम पीटीआर के डॉ. दक्ष गंगवार के नेतृत्व में बनाई गई है। इसमें फॉरेस्टर मोहम्मद उमर और पुष्कर सिंह भी शामिल हैं। चौथी टीम बेलरायां के प्रभारी रेंजर विमलेश के नेतृत्व में गठित की गई है। इसमें लखनऊ चिड़ियाघर के डॉ. विजयेंद्र यादव को शामिल किया गया है। इसके अलावा बाघिन की लोकेशन तलाशने के लिए वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) और लखनऊ चिड़ियाघर के विशेषज्ञों को टीम में शामिल किया गया है। साथ ही खैरटिया वन क्षेत्र से सटे खेतों के अंदर अस्थायी मचान बनाकर वनकर्मी 24 घंटे बारी-बारी से बाधिन की निगरानी मे जुटे हैं। गश्ती टीमें पेट्रोलिंग के दौरान नोट कैम एप के माध्यम से फोटो लेकर मिशन मझरा ग्रुप में एक दूसरे से सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं। बाघिन की गतिविधियों की जानकारी उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी बायोलाजिस्ट अमन भटिया, अपूर्वा और फॉरेस्टर मोहम्मद उमर को सौंपी गई है।
दो बाघिन की सक्रियता ने वन कर्मियों की बढ़ाईं मुश्किलें
क्षेत्र में दो बाघिन सक्रिय होने से वन विभाग की चुनौतियां और बढ़ गई हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन के मुताबिक, अब तक बाघिन टीमों की नजर में नहीं आई है। हालांकि उसकी तस्वीरें कैमरे में ट्रैप हुई हैं और पगचिह्न भी मिल रहे हैं।