खादी नेताओं की ही पोशाक नहीं बल्कि एक फैशन का रूप लेती जा रही है। आजादी के बाद स्वदेशी के प्रति रुझान से बढ़ी खादी की लोकप्रियता में दिन पर दिन बढ़ोतरी हुई है। यदि खादी की पोशाक बुजुर्गों की पहली पसंद है तो अब इसने युवाओं के फैशन में अपनी जगह बना ली है। खादी की पोशाक अब केवल नेताओं की पहचान नहीं है बल्कि आम लोगों में भी ये एक स्टेटस सिंबल का रूप लेती जा रही है।
लखीमपुर शहर के मेन रोड पर स्थित खादी भंडार के प्रबंधक सीआर वर्मा कहते हैं कि खादी के कपड़ों की बिक्री में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। चुनाव के दौरान तो खादी की रिकार्ड बिक्री होती है। सामान्य तौर पर गर्मी के मौसम में भी खादी की बिक्री बढ़ जाती है। खादी के कपड़ों के रखरखाव पर भले ही ज्यादा खर्च होता हो लेकिन ये है बहुत आरामदेह। यही कारण है कि आज के युवाओं ने खादी को फैशन में शामिल किया है। गांधी जयंती के मौके पर खादी के कपड़ों पर छूट मिलने पर खादी की बिक्री में हर साल बढ़ोतरी होती है।
पलियाकलां। नगर में श्री गांधी आश्रम खादी भंडार 40 साल से चल रहा है। यहां के खादी भंडार ने अपने यहां बिक्री में गिरावट दर्ज की है। भंडार में रजाई के खोल, गद्दे, कुर्ता, पायजामा का कपड़ा, गमछे आदि उपलब्ध हैं। यह सब आधुनिकता की भेंट चढ़ गया है। युवा पीढ़ी इसे खरीदना पसंद नहीं करती है। जो भी बिक्री है वह बुजुर्गों की बदौलत है। इंचार्ज नरेंद्र सिंह ने बताया कि यहां खरीदारी कम है।
गोला गोकर्णनाथ। सदर चौराहे के समीप अलीगंज रोड स्थित खादी भंडार की दुकान 60 साल पुरानी है। दुकान पर कार्यरत भूपेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि बिक्री बढ़ने से अब दुकान अपने निजी भवन में आ गई है। 10 प्रतिशत की छूट चल रही है। यहां से सांसद रवि प्रकाश वर्मा, रोमी साहनी, अजय गिरि सहित तमाम नेता खरीदारी करते हैं।