लखीमपुर खीरी। खेती के प्रशिक्षण में कृषि विशेषज्ञ जनार्दन मिश्रा ने कहा कि रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से जंगली जानवर और मित्र कीट मधुमक्खियां मर रही हैं। यह किसानों के लिए काफी नुकसानदायक है। मधुमक्खियों की कमी से हमारे पौधों में परागण की समस्या बढ़ती जा रही है।
छाउछ चौराहे के निकट एक गेस्ट हाउस में महिला किसानों को एम ट्रस्ट और आक्सफैम के सहयोग से प्रशिक्षण दिया गया। एम के प्रतिनिधि रणविजय राय ने कहा कि मितौली ब्लॉक में जलवायु अनुकूलन परियोजना पर कार्य में महिला किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहीं हैं। इसे और व्यापक बनाने की जरूरत है। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सोहेल ने कहा कि जलवायु पद्धतियों को अपनाकर अपनी मृदा और पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं। उन्होंने फसल चक्र अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि गहरी जड़ वाली दलहनी फसल के बाद उथली जड़ वाली तिलहनी फसल उगानी चाहिए। फसलों में बीमारियों की रोकथाम बुवाई के समय बीज शोधन करके कर सकते हैं। प्रमोद कुमार शुक्ला ने छोटे किसानों को गन्ने की खेती न करने की सलाह दी। प्रशिक्षण में सुदामा देवी, मिथलेश कुमारी, राजीव रंजन झा मौजूद रहे।