हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में चलाए गए इस अभियान के दौरान महिला पुलिसकर्मियों सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। टीम के पहुंचते ही कब्जाधारक परिवार की महिलाओं ने चीख-पुकार शुरू कर दी और हाथ जोड़कर कुछ समय की मोहलत मांगने लगीं।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि विवादित भूमि नगर पालिका की संपत्ति है, जहां पहले कांजी हाउस संचालित होता था, बाद में यहां दुकानें बनाई गईं। उन्होंने बताया कि 37 वर्षों से मुकदमा जगरानी देवी के नाम से पहले निचली अदालत, फिर सेशन कोर्ट और अंततः हाईकोर्ट तक चला। 20 मार्च 2026 को हाईकोर्ट ने नगर पालिका के पक्ष में फैसला सुनाते हुए तत्काल कब्जा दिलाने के आदेश दिए थे। इसके बाद टीम चार बार कब्जा लेने पहुंची, लेकिन विरोध के कारण कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।
वहीं कब्जाधारक हरेंद्र कुमार का कहना है कि उनका परिवार करीब 40 वर्षों से दुकान और उससे जुड़े बरामदे में रह रहा है। उनका आरोप है कि नगर पालिका उन्हें जबरन बेदखल कर रही है। उन्होंने बताया कि परिवार आजीविका के लिए फुटपाथ पर कपड़े की दुकान लगाता है।