गौरीफंटा/पलियाकलां। भारतीय क्षेत्र से कई ऐसे सामान हैं, जिनकी तस्करी नेपाल के लिए हो रही है, जबकि नेपाल से भी भारतीय क्षेत्रों में तस्करी का माल आ रहा है। हालांकि इसमें सबसे ज्यादा नशीले पदार्थ ही हैं, जिसके चलते ही धनगढ़ी और पलिया में इन सामानों की बरामदगी हुई है।
भारत-नेपाल सीमा से सटे लखीमपुर जिले की तिकुनिया, बेलरायां, चंदनचौकी, सौनहा, बजाही, बनकटी, सूड़ा, सरियापारा, कजरिया, बनगवां, खजुरिया, बसही, संपूर्णानगर, पीलीभीत व उत्तराखंड के बनबसा के अवैध रास्तों से तस्करी कर गेहूं, चावल, प्याज, खाद, हार्डवेयर, कपड़ा, मोबाइल, किराना आदि का माल पार किया जाता है।
इतना ही नहीं तस्कर इन रास्तों का नशीले पदार्थों की तस्करी करने में भी फायदा उठाते हैं। इन रास्तों पर कम चेकिंग होने के कारण तस्करों के लिए मुफीद गढ़ बने हुए हैं। वहीं पड़ोसी देश नेपाल के कैलाली व कंचनपुर जिलों की टीकापुर, भजनी, लमकी, फुलवारी, डिपो बाजार, धनगढ़ी बाजार, धनगढ़ी गांव, जुगेड़ा, बंगरा कटान, बैलोरी, टाउन, आईबीआरडी, फुलवारी, हसुलिया आदि ऐसे गढ़ हैं, जो तस्करी के लिए ही जाने जाते हैं। इन रास्तों पर न तो भारतीय एजेंसियों और न ही नेपाली एजेंसियों की नजर रहती है।
नेपाल से आता है यह माल
नेपाल से चरस, शराब, सिगरेट, चाइनीज लाइटर, गुटखा, पेस्ट, काॅस्मेटिक का सामान और कंप्यूटर के पार्ट्स तस्करी होकर आते हैं। यह ऐसा माल है जो नेपाल में सस्ता मिलता है लेकिन भारत में इसकी कीमत करीब डेढ़ गुनी होती है।
नेपाल को जाता है यह माल
नेपाल में भारत से सोना, कपड़ा, हार्डवेयर, किराना, चीनी, गेहूं, चावल, गन्ना, लाही समेत अन्य कई जरूरत की वस्तुओं की तस्करी की जाती है। यह माल नेपाल में जहां काफी महंगा मिलता है, वहीं भारत में इसकी कीमत कम है।
तस्करी के मालों की भारत और नेपाल में कीमतें
भारत में सोने का मूल्य 76 हजार रुपये प्रति दस ग्राम है तो नेपाल में 81 हजार रुपये है। इसके अलावा भारत में गेहूं का समर्थन मूल्य 2275 रुपये प्रति क्विंटल है तो नेपाल में 4250 से 4400 रुपये क्विंटल गेहूं है। सिल्की चावल भारत में 6600 रुपये क्विंटल और नेपाल में 7500 रुपये क्विंटल है। प्याज भारत में 35-40 रुपये किलो तो नेपाल में 75 रुपये किलो है।
चीनी भारत में 40 रुपये किलो तो नेपाल में 62 रुपये किलो है। खाद में यूरिया भारत में 350-400 रुपये बोरी है, तो नेपाल में 600-700 रुपये में मिलती है। उधर नेपाल से आने वाली चरस की अनुमानित कीमत करीब एक हजार रुपये ग्राम है, लेकिन वह भारत में हजारों रुपये की बिकती है। चाइनीज लाइटर में भी प्रति कार्टून करीब ढाई हजार रुपये का फर्क है।
नेपाल में तस्करी का माल बरामद होना है सबूत
बीते 24 अप्रैल को भारतीय क्षेत्र के अवैध रास्तों से तस्करी कर नेपाल के बैलोरी नगर पालिका के कलकत्ता गांव से पुलिस ने 200 क्विंटल गेहूं व ट्रैक्टर-ट्राॅली को पकड़ा था। जिसका बाद में 15 लाख रुपये का सीजर बनाकर कस्टम को सौंपा था। इसके अलावा धनगढ़ी में घुईंया घाट गांव से तस्करी कर तीन डनलपों में लाया गया करीब 37 क्विंटल गेहूं पकड़ते हुए भारत के थारू क्षेत्र कजरिया गांव के तीन लोगों को भी गिरफ्तार किया था।
भारत में नशीले पदार्थों संग ज्यादा गिरफ्तार हुए हैं लोग
नेपाल के धनगढ़ी से सटे भारत के पलिया शहर में नशीले पदार्थों के साथ लोग ज्यादा गिरफ्तार हुए हैं और यह भी नेपाल के लिए ही तस्करी का काम करते थे। इसका जीता जागता उदाहरण अभी हाल ही में सात दिसंबर को अनमोल गुप्ता व सुरेश कुमार मौर्या पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए आरोपी हैं। इन आरोपियों के पास से पुलिस ने 57.15 ग्राम स्मैक बरामद की थी और यह नेपाल के कैसीनो में भी इसकी सप्लाई करते थे।
इससे पूर्व दो सितंबर 2024 को पुलिस ने संदिग्ध पाउडर के साथ मुकेश बंसल, किशुन पाल, विजय कुमार व प्रदीप बंसल को गिरफ्तार किया था। यह पाउडर भी नेपाल से आने की बात कही जा रही है। सात अगस्त 2024 को पलिया व संपूर्णानगर पुलिस ने मुठभेड़ में हजारा थाना के आरोपी शमशाद को गिरफ्तार किया था। जिसके पास से पुलिस ने तमंचा व 26 ग्राम स्मैक बरामद की थी। यह भी अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफिया बताया जा रहा था। 29 मई 2024 को पलिया पुलिस ने नेपाल निवासी दो युवकों गिरफ्तार किया था। यह युवक भारत के राजस्थान से चोरी कर भागे थे और नेपाल भागने की फिराक में थे। पुलिस ने इनके पास से एक लाख 64 हजार 190 रुपये की नकदी व 15 लाख के कीमती जेवरात बरामद किए थे।