गोला गोकर्णनाथ। सावन भगवान शिव की भक्ति का पावन महीना है, लेकिन गोला गोकर्णनाथ के लिए यह केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि स्थानीय कारोबार और आजीविका का सबसे बड़ा सहारा भी है। जैसे-जैसे शिवभक्तों की भीड़ बढ़ती है, वैसे-वैसे शहर के बाजारों की रौनक लौट आती है।
रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर पूजन सामग्री, फल, प्रसाद, खिलौने, चूड़ी, धार्मिक पुस्तकें और राखी के कारोबारियों तक, सैकड़ों छोटे-बड़े व्यापारियों की रोजी-रोटी सावन की चहल-पहल से जुड़ जाती है। कॉरिडोर निर्माण ने स्थानीय दुकानदारों की उम्मीदों को भी नया बल दिया है।
पौराणिक शिव मंदिर के निकट तीर्थ बाजार, चूड़ी वाली गली और आसपास के क्षेत्र में फूल-बेलपत्र, पूजन सामग्री, सौंदर्य प्रसाधन, खिलौने, फल, लाई, प्रसाद, बेल्ट, पर्स, घड़ी, चूड़ी, बैग, इलेक्ट्रॉनिक सामान, धार्मिक पुस्तकें तथा जले, कटे और फटे नोट बदलने सहित 300 से अधिक दुकानें संचालित होती हैं। सावन में इन दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ कारोबार को नई गति देती है।
मेला मैदान के कारोबारी राजीव कुमार बताते हैं कि वह राखी का थोक व्यापार करते हैं। यह कारोबार उनके दादा स्वर्गीय सोहनलाल पटवा ने शुरू किया था, जिसे बाद में उनके पिता स्वर्गीय विद्याराम पटवा ने आगे बढ़ाया। वह कोलकाता और अहमदाबाद से रेडीमेड सामान तथा दिल्ली से लूज सामान मंगाते हैं, जिसकी मैन्युफैक्चरिंग गोला में कराई जाती है। सावन के दौरान बिहार, नेपाल, लखनऊ, सीतापुर और शाहजहांपुर से व्यापारी यहां खरीदारी के लिए पहुंचते हैं।
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बेल्ट, पर्स, दूल्हे का मौर, पगड़ी, सेहरा और साज-सज्जा का सामान बेचता हूं। यहां का अधिकांश कारोबार श्रद्धालुओं पर ही निर्भर है।
-अयोध्या प्रसाद वर्मा, तीर्थ बाजार
सावन कारोबार का सबसे अच्छा समय होता है, लेकिन पिछले चार वर्षों से परिक्षेत्र के सभी रास्ते बंद होने से व्यापार प्रभावित हो रहा है।
-सोनू गुप्ता, सौंदर्य प्रसाधन विक्रेता
गोला में शिव मंदिर के निकट तीर्थ बाजार। संवाद
गोला में शिव मंदिर के निकट तीर्थ बाजार। संवाद