लखीमपुर खीरी। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज की मुकम्मल व्यवस्थाएं नहीं हैं। कहीं बेहोशी के डॉक्टर (एनेस्थेटिस्ट) तो कहीं सर्जन का अभाव है। ऐसे में वहां ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं। मरीजों को जिला अस्पताल की दूरी नापनी पड़ रही है।
आज विश्व एनेस्थेटिस्ट दिवस पर सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों की पड़ताल की गई तो यह तस्वीर सामने आई। पता चला कि जिले की 15 सीएचसी में सिर्फ चार में एनेस्थेटिस्ट हैं। इनमें निघासन सीएचसी में अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार बतौर निश्चेतक (एनेस्थेटिस्ट) काम कर रहे हैं, जबकि यहां सर्जन की तैनाती नहीं है। यही हाल मितौली सीएचसी का भी है। यहां एनेस्थेटिस्ट डॉ. अखिलेश खरे हैं, जबकि यहां न तो सर्जन है और न ही स्त्री रोग विशेषज्ञ की स्थायी तैनाती है। यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ को प्रसव के लिए आपातकालीन में बुलाया जाता है।
वहीं, फरधान सीएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में डॉ. प्रतिभा अवस्थी की तैनाती है, लेकिन यहां एनेस्थेसिस्ट न होने से प्रसूताओं को जिला महिला अस्पताल ही रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा जिले के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में निश्चेतक डॉक्टरों की कमी के कारण ऑपरेशन ठप होने के कगार पर हैं। आपातकालीन सर्जरी और अन्य ऑपरेशन प्रभावित नहीं हो पा रहे हैं। मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों या जिला अस्पताल की ओर रुख करना पड़ रहा है। इससे मरीजों को मोटे खर्च के साथ अनावश्यक दौड़ लगानी पड़ रही है।
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जनपद की सबसे पुरानी तहसील होने के बाद भी निघासन अस्पताल में महिला व पुरुष कोई भी सर्जन मौजूद नहीं है। इस वजह से यहां की जनता को बीमार होने पर ऑपरेशन के लिए जिला अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में रुख करना पड़ता है।
प्रदीप गुप्ता, अध्यक्ष, निघासन व्यापार मंडल
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सीएचसी में सर्जन न होने से प्रसव व ऑपरेशन की सुविधा बंद है। कई बार गर्भवती महिलाओं को गंभीर हालत में रेफर कर दिया जाता है। इस वजह से गरीब मरीजों को आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। जिला प्रशासन को अस्पताल की व्यवस्थाएं दुरुस्त करानी चाहिए।
अंशुल दीक्षित, समाजसेवी, निघासन
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निघासन में कोई महिला सिजेरियन डॉक्टर मौजूद नहीं है। यदि कोई प्रसव के लिए आता है तो पलिया में तैनात डॉ. नीतू वर्मा को ऑन कॉल ऑपरेशन के लिए बुलाया जाता है।
डॉ. राजेंद्र कुमार, सीएससी अधीक्षक, निघासन
सभी सीएचसी पर निश्चेतक और सर्जन नहीं हैं। अभी जहां एफआरयू यानि फर्स्ट रेफरल यूनिट चल रही है। सभी जगह कम से कम सिजेरियन प्रसव के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ और एक एनेस्थेटिस्ट की व्यवस्था मुकम्मल करने के प्रयास हैं। इसमें मोहम्मदी, मितौली, पलिया और निघासन में व्यवस्था बनाई गई है। जल्द ही धौरहरा सीएचसी पर भी व्यवस्था की जाएगी।
डॉ. संतोष गुप्ता, सीएमओ
प्रदीप गुप्ता