वार्ता करते पलिया यूनियन पदाधिकारी । स्रोत : यूनियन
पलियाकलां। क्षेत्र में डग्गामार और अवैध छोटे वाहनों के बढ़ते दबाव से निजी बस ऑपरेटरों का कारोबार संकट में है। सवारियां नहीं मिलने से बसें खाली चल रही हैं। इससे नाराज पलिया बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी को पत्र भेजकर अवैध वाहनों के संचालन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो 28 सितंबर को अपनी सभी बसों के दस्तावेज एआरटीओ कार्यालय में सरेंडर कर देंगे।एसोसिएशन के मुताबिक लखीमपुर से गौरीफंटा (वाया भीरा-बिजुआ), खजुरिया, दुधवा, निघासन और पलिया से मैलानी, चंदन चौकी, गोला व राणा प्रतापनगर जैसे प्रमुख मार्गों पर निजी स्टेज कैरिज बसों का संचालन होता है। आरोप है कि इन मार्गों पर पिछले कई वर्षों से निजी कार, टैक्सी, ई-रिक्शा, टाटा मैजिक और सीएनजी ऑटो जैसे छोटे वाहन अवैध रूप से दौड़ रहे हैं।
पदाधिकारियों का आरोप है कि ये वाहन निजी बसों के आगे-पीछे लगकर सवारियां बैठाते हैं। विरोध करने पर इनके चालक बस स्टाफ से विवाद करते हैं। ई-रिक्शा और सीएनजी ऑटो हाईवे पर क्षमता से अधिक सवारियां भरकर चलते हैं। इससे सड़क हादसे की आशंका के साथ प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति बनती है।
एसोसिएशन का दावा है कि गौरीफंटा से रोज करीब 150 अवैध टैक्सियां संचालित हो रही हैं। सवारियां नहीं मिलने से निजी बसों को खाली चलना पड़ रहा है। बस मालिकों के लिए डीजल, टूट-फूट की मरम्मत, टैक्स, बीमा, फिटनेस और टायरों का खर्च उठाना भी मुश्किल हो गया है।
पदाधिकारियों के मुताबिक अवैध वाहनों के संचालन से निजी बस ऑपरेटरों के साथ रोडवेज को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है।