लखीमपुर खीरी। ड्राइविंग लाइसेंस के टेस्ट में फेल होने के बाद अब दोबारा फीस जमा कर परीक्षा देने का मौका नहीं मिलेगा। पहले मान्यता प्राप्त चालक प्रशिक्षण केंद्र से ड्राइविंग सीखनी होगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ही स्थायी लाइसेंस की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
बाइक व छोटे वाहनों के लिए 29 घंटे और ट्रक, बस समेत बड़े वाहनों के लिए 38 घंटे का प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। इसके लिए क्रमश: छह हजार और 10 हजार रुपये शुल्क निर्धारित है। परिवहन आयुक्त कार्यालय ने नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। एआरटीओ शांति भूषण पांडेय ने बताया कि परिवहन आयुक्त का 17 अगस्त का आदेश मिलने के बाद इसका पालन शुरू करा दिया गया है।
छाउछ चौराहा-बेहजम रोड पर लोटस वैली के सामने प्रत्यायन चालक प्रशिक्षण केंद्र (एडीटीसी) में चालक क्षमता परीक्षा पास करने के बाद एआरटीओ कार्यालय से लाइसेंस जारी होते हैं। यहां हर माह 350 से 400 लोग टेस्ट देते हैं, जिनमें करीब 70 प्रतिशत फेल हो जाते हैं। अब फेल आवेदकों को एडीटीसी से प्रशिक्षण लेना होगा।
प्रशिक्षण पूरा होने पर केंद्र से सारथी पोर्टल पर फॉर्म-5बी जनरेट किया जाएगा। इसी के आधार पर स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की कार्रवाई होगी।
टेस्ट में 52 से अधिक कैमरों की नजर
एडीटीसी में 52 से अधिक कैमरों से टेस्ट की वीडियो रिकॉर्डिंग होती है। बायोमीट्रिक सत्यापन, सर्वर, एलसीडी स्क्रीन और कंप्यूटर सिस्टम की व्यवस्था है। टेस्ट के बाद तत्काल परिणाम दिया जाता है। बाइक, ट्रक, बस, ट्रैक्टर और ऑटो समेत विभिन्न वाहनों के लिए टेस्ट ट्रैक भी हैं।