लखीमपुर खीरी। मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली किरणें आंख के लिए ही नहीं, दिमाग की नसों के लिए भी खतरा है। मोबाइल में घंटों समय देने वाले युवाओं में आंखों व अनिद्रा जैसी समस्या बढ़ी है। चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे मरीज आ रहे हैं, जिन्हें अनिद्रा की शिकायत हो रही है।
जिला अस्पताल में रोजाना करीब 1400 से 1500 की ओपीडी हो रही है। यहां आंखों व मानसिक रोग को लेकर भी मरीजों की काफी संख्या आ रही है। चिकित्सकों का कहना है कि इस समय लोग शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान कम दे रहे हैं, बल्कि ज्यादा से ज्यादा समय मोबाइल पर दे रहे हैं।
इसलिए ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी हुई है। चिकित्सकों ने बताया कि मोबाइल की किरणें आंखों के लिए खतरनाक होती हैं। इसलिए लंबे समय तक माेबाइल न चलाएं। आंखों को झपकाते रहें। बताया कि ओपीडी में प्रतिदिन 60-70 मरीज आंखों की समस्या को लेकर आते हैं। इसमें ड्राई आई के भी मरीज रहते हैं। वहीं मोबाइल की लत को लेकर अनिद्रा सहित अन्य मरीज भी आ रहे हैं।
इन चीजों से बनाएं दूरी
टेलीविजन, स्मार्टफोन, गेमिंग सिस्टम, कम्प्यूटर स्क्रीन।
मोबाइल से होने वाली दिक्कतों को लेकर 150-200 मरीज प्रतिमाह आ रहे हैं। बच्चों में भी समस्याएं हो रही हैं। मोबाइल की लत के कारण बच्चा परिवार से अलग हो रहा है और उसकी शारीरिक व मानसिक क्षमता कम हो रही है। साथ ही अनिद्रा की समस्या हो रही है।
डॉ. अखिलेश शुक्ला, मानसिक रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
मोबाइल चलाने की वजह से आंखों के कई मरीज आते हैं। इनकी किरणें आंखों के लिए खतरनाक होती हैं। इसलिए ज्यादा देर तक मोबाइल व कंप्यूटर पर काम करने वाले लोगों को थोड़ी-थोड़ी देर में ब्रेक लेना चाहिए। साथ ही पलकों को झपकाते रहना चाहिए।
डॉ. पूनम वर्मा, नेत्र रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल