जिले में दुधवा नेशनल पार्क के अलावा और भी बहुत कुछ है जिसके जरिए पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। यह जिला प्राकृतिक रूप से तो समृद्ध है ही, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से भी मालामाल है। यहां पर्यटन विकास की तमाम संभावनाएं हैं लेकिन इस अनमोल विरासत को सहेजने, सजाने, संवारने और पर्यटन केंद्र बनाने का प्रयास अब तक नहीं हुआ। तीन साल पहले टूरिस्ट कॉरीडोर बनाने की बात चली थी वह भी ठंडे बस्ते में चली गई।
जिले को तीन वर्गों प्राकृतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत में बांटा जा सकता है। प्राकृतिक विरासत में दुधवा नेशनल पार्क के साथ-साथ जिले के वेटलैंड्स को पक्षी विहार के रूप में विकसित किया जा सकता है। जबकि थारू संस्कृति को सांस्कृतिक विरासत के रूप में उभारा जा सकता है। जिले में कई ऐसे भवन और मंदिर हैं जो वास्तुकला के नजरिए से अद्भुत हैं। उन्हें सजा संवार कर पर्यटन केंद्र का रूप दिया जा सकता है।
एडीएम एसपी सिंह ने बताया कि जिले के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक
स्थलों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए जिले से कई बार
रिपोर्ट भेजी गई है। शासन के निर्देश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रकृति के नजारों पर पड़े सैलानियों की नजर
पर्यटन के मामले में दुधवा नेशनल पार्क तो पूरे प्रदेश की शान है। इसके अलावा जिले की सेमरई और नगरिया झीलों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। सर्दियों के मौसम में ये दोनों झीलें पक्षी विहार के रूप में विकसित कर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है। कभी पांडवों की अज्ञातवास स्थली रहे अंतर्वेद के जंगल को प्राकृतिक पर्यटन केंद्र बनाया जा सकता है।
थारूओं की अनूठी संस्कृति और कारीगरी
भारत-नेपाल सीमा पर 41 गांवों में बसे थारू वनवासियों की अनूठी संस्कृति, उनका रहन सहन और सबसे बढ़कर उनके हाथों की कारीगरी को अंतराष्ट्रीय स्तर पर उभारा जाए तो वह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। इससे एक तो उनकी कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
यह स्थल भी लुभाएंगे सैलानियों को
मंडूक तंत्र और श्रीयंत्र पर निर्मित ओयल का मेढक शिव मंदिर, सिंगाही का भूलभुलैया शिव मंदिर वास्तुकला के दृष्टिकोण से पूरी दुनिया में बेमिसाल है। ओयल का मेढक शिव मंदिर वर्ष 1860-70 के मध्य राजा अनिरुद्ध सिंह ने तो सिंगाही के भूलभुलैया शिव मंदिर का निर्माण उन्नीसवीं शताब्दी में रानी सुरथ कुमारी शाह ने कराया था। सिंगाही का भव्य राजमहल दर्शनीय है। यह वकिंघम पैलेस के मॉडल पर बना हुआ है। इन स्थलों का भी पर्यटन केंद्र के रूप में विकास किया जा सकता है।
ठंडे बस्ते में गया टूरिस्ट कॉरीडोर
प्रदेश सरकार ने जिले में एक टूरिस्ट कॉरीडोर तैयार करने को मंजूरी दी थी। इसके लिए सर्वे भी हुआ लेकिन बाद में यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। इसमें दुधवा नेशनल पार्क के रास्ते में पड़ने वाले दर्शनीय स्थलों को शामिल किया जाना था लेकिन ऐसा हो न सका।