लखीमपुर खीरी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए जारी आरक्षण सूची के अंतिम प्रकाशन पर हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद से सभी की निगाहें सोमवार को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर रहेंगी, जिसमें प्रदेश सरकार की ओर से जवाब दाखिल किया जाना है।
पिछले पांच पंचायत चुनाव की आरक्षण सूची के रोटेशन के आधार पर आरक्षण प्रक्रिया अपनाने में 2015 की सूची को शामिल करना सरकार के लिए फांस बन गया है, क्योंकि 2015 में नए सिरे से आरक्षण की प्रक्रिया हुई थी। इससे रोटेशन प्रक्रिया में 2015 की आरक्षण सूची की वैधता शून्य मानी जा रही है। यदि इसी आधार पर कोर्ट ने सरकार का फैसला पलटा तो आरक्षण सूची में फिर से बदलाव हो सकता है, जिससे चुनाव प्रचार में जुटे उम्मीदवारों को झटका भी लग सकता है।
इस वर्ष आरक्षण प्रक्रिया में आंशिक संशोधन करते हुए पिछले पांच चुनावों की आरक्षण सूची के रोटेशन के आधार पर नई आरक्षण सूची तैयार की गई है। इसमें जिस वर्ग के लिए सीटें आरक्षित नहीं हुई थीं उन्हें प्राथमिकता से आरक्षित किया गया है। वहीं 2015 के पंचायत चुनाव में जिस वर्ग के लिए जो सीट आरक्षित रहीं, उसे इस वर्ष दोबारा उस वर्ग के लिए आरक्षित नहीं किया गया। ऐसे ही अन्य बिंदुओं को शामिल करके आरक्षण प्रक्रिया को काफी हद तक सरल और पारदर्शी बनाने के प्रयास किए गए थे।
तीन मार्च 2021 को अनंतिम आरक्षण सूची प्रकाशित होने के बाद से जनपद में 1165 ग्राम पंचायतों में प्रधान पदों को लेकर सबसे ज्यादा गांवों में माहौल सियासी हो चुका है। वहीं आरक्षण सूची के खिलाफ 1125 आपत्तियां दर्ज कराई गईं, जिनके निस्तारण के बाद शनिवार से रविवार तक अंतिम आरक्षण सूची का प्रकाशन किया जाना था। इससे पहले ही 12 मार्च 2021 को हाईकोर्ट ने दायर जनहित याचिका की सुनवाई के बाद अंतिम आरक्षण सूची के आवंटन व प्रकाशन पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद से अफसर से लेकर गांवों में उम्मीदवार सहमे हैं। अंतिम आरक्षण सूची के प्रकाशन पर रोक लगाए जाने के कई मायने लगाए जा रहे हैं, जिसमें सबसे अहम कारण 2015 की आरक्षण सूची को रोटेशन में शामिल करना बताया जा रहा है।
रोटेेशन प्रक्रिया में 2015 के आरक्षण आंकड़ों को शामिल किए जाने की वैधता पर इसलिए भी सवाल उठे हैं क्योंकि तब पिछले चुनावों के आंकड़ों को रोटेशन में न लेकर नए सिरे से आरक्षण किया गया था। इससे जानकारों का मानना है कि याचिकाकर्ता ने अच्छा सवाल उठाया है, जिससे हाईकोर्ट को संज्ञान लेते हुए दखल दिया है। इस वर्ष आरक्षण प्रक्रिया में 2015 की आरक्षण सूची को विशेष आधार बनाया गया है, जिससे ज्यादातर ग्राम पंचायत के आरक्षण की स्थिति बदली है। ऐसे में यदि 2015 के चुनाव आरक्षण की वैधता को शून्य घोषित किया किया जाता है तो आरक्षण प्रक्रिया में रोटेशन को बदलना पड़ेगा।
इससे सैकड़ों ग्राम पंचायतों के आरक्षण में फिर से बदलाव होना तय माना जा रहा है। हालांकि अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। तो वहीं आरक्षण सूची के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराने वाले ग्रामीणों में खुशी की लहर है और हाईकोर्ट के फैसले को लेकर गांवों में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।
एससी आरक्षित अदलीसपुर के लिए 45 आपत्तियां आईं
धौरहरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत अदलीसपुर अनुुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई, जिसके खिलाफ 45 आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। ऐसे ही बेहजम ब्लॉक की ग्राम पंचायत करनपुर मुवैया, पसगवां ब्लॉक की लिधियाई, मितौली ब्लॉक की खंजननगर समेत सैकड़ों ग्राम पंचायतों के आरक्षण के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। 2015 की आरक्षण सूची की वैैधता शून्य हुई, तो सैकड़ों ग्राम पंचायतों के आरक्षण की मौजूदा स्थिति में फिर से बदलाव आ सकता है। इससे आरक्षित सीटों पर चुनाव मैदान में ताल ठोक चुके उम्मीदवारों की भी धड़कनें बढ़ी हुई हैं।
आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम आरक्षण सूची तैयार कराई जा चुकी है। आरक्षण सूची को लेकर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी है, जहां सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा। शासन के निर्देशानुसार ही अंतिम आरक्षण सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
- सौम्य शील सिंह, डीपीआरओ