खुद और दूसरों की सुरक्षा को समझें सर्वोपरि
दिवाली में बच्चे और बड़े पटाखे जरूर छुड़ाते हैं। इन पटाखों का लोगों के जीवन पर अच्छा असर तो नहीं पड़ता। बच्चे, बुजुर्ग, बीमार और गर्भवती महिलाओं को पटाखों के प्रभाव से बीमारियों से घिरना पड़ता है। दिवाली पर समाज के किसी भी व्यक्ति पर पड़ने वाले इन प्रभावों का जिम्मेदार कोई और नहीं, बल्कि हम खुद ही हैं। खुशियों के त्योहार को दुखों में बदलना समझदारी नहीं कहलाएगी।
जी हां, पटाखे बहुत घातक हैं। आंख कान पर और सांस लेने की क्रिया पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ता है। डॉक्टरों की माने तो आंख कान और सांस लेने की क्रिया वाले अंग शरीर में बेहद संवेदनशील हैं। पटाखों की वजह से हर साल कितने ही लोग अंधता का शिकार बनते हैं। उनके जीवन से उजाला कोसों दूर चला जाता है। लोग के सुनने की क्षमता का ह्रास हो जाता है। दरअसल पटाखों से निकलने वाली चिंगारी बेहद खतरनाक होती है। विशेषज्ञों की माने पटाखे की चिंगारी सोने को भी पिघला सकती है। इससे कार्निया (आंख की काली पुतली) जलने का अंदेशा रहता है। पटाखों में मिलाया जाने वाला गन पाउडर बेहद खतरनाक है। सावधानी ही इससे बचा सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों पर पटाखों में मिलाए जाने वाले केमिकल्स का प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है। पटाखों का धुआं वातावरण में घुलने के कारण सांस की बीमारी लगने का अंदेशा रहता है। सांस की नली में सूजन आ जाती है और अस्थमा घेर लेता है। गर्भस्थ शिशु के विकास पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। त्वचा को भी इससे नुकसान होता है।
ऐसे करें बचाव
पटाखे न छुड़ाने को प्राथमिकता दें। फिर भी यदि पटाखे जलाएं तो बच्चों को अकेले यह काम न करने दें। संभव हो तो चश्मा लगाकर ही पटाखे जलाएं। पटाखे जलाने के बाद हाथ अवश्य धोएं और कोल्डक्रीम लगाएं। तेज आवाज वाले पटाखों से बचें। पटाखे न जलाने वाले लोग धुएं वाले वातावरण से दूर रहें। यदि धुएं वाले स्थान पर रुकना मजबूरी हो तो कुछ समय बाद साफ हवा वाले स्थान पर पहुंचकर गहरी सांसेें लें।
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ऐसे करें उपचार
आंख में जलन होने पर रगड़े नहीं। साफ पानी से आंख की धुलाई करें। आंख में पटाखे के कण पड़ने या चोट लगने पर तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ की सहायता लें। आंख जलने पर गाज से ढक लें। शरीर के किसी अन्य भाग पर पटाखे की चिंगारी पड़ने पर उसे डिटॉल से साफ करें। फिर किसी अच्छी कंपनी का ऑयंटमेंट लगाएं।
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हो सकती हैं यह शिकायतें
पटाखों से वातावरण में नाइट्रस ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है। इससे आंख में जलन और खुजली की शिकायत हो सकती है। आंख से पानी बह सकता है। आंख लाल हो सकती है। सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। अनहोनी होने पर डॉक्टर की मदद लें।
- डॉ. रूपक टंडन, नेत्र विशेषज्ञ।
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बचाव ही सबसे बड़ी सुरक्षा
पटाखे जलाने से वातावरण दूषित होता है। ऐसे वातावरण में सांस लेने से अस्थमा होने का सबसे अधिक खतरा रहता है। त्वचा भी प्रभावित होती है। गर्भस्थ शिशु के विकास पर दुष्प्रभाव पड़ता है। सबसे बेहतर तरीका यही है कि पटाखे जलाने से बचा जाए। ऐसा न होने पर छोटी सी भी शारीरिक समस्या का अनुभव होते ही डॉक्टर की सलाह लेेना जरूरी है।
- डॉ. अमित सिंह, फिजीशियन।
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ग्रीन दीपावली मनाएं
धर्मसभा इंटर कॉलेज लखीमपुर के रसायन विज्ञान प्रवक्ता आलोक गोयल का कहना है कि पर्यावरण की समस्या से बचने के लिए ग्रीन दीपावली मनाएं। विदेशी सामान का बहिष्कार करें। स्वदेशी निर्मित सामान से ही प्रकाशपर्व मनाएं। उन्होंने कहा कि दीये जलाने से जहां कुम्हार को मेहनत का फल मिल जाता है, वहीं पर्यावरण शुद्ध होता है।
इको-फ्रैंडली मनाएं दिवाली
पर्यावरणविद और क्षेत्रीय वन अधिकारी मुकेश रायजादा का कहना है कि आतिशबाजी और झालरें खासकर पक्षियों के लिए अत्यंत खतरनाक होती हैं। बेजुबान पक्षियों के जीवन की रक्षा के लिए ईको-फ्रैंडली मनाएं। अत्यधिक शोर और प्रकाश वाले पटाखे का प्रयोग न करें। इसके अलावा प्रकाश के लिए दीयों का ही प्रयोग करें।