लखीमपुर खीरी। अतिरिक्त दहेज के लिए विवाहिता को प्रताड़ित कर मौत के घाट उतारने के मामले में एडीजे रेनू सिंह ने पति और ससुर को दोषी करार दिया। दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। साथ ही 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, बेहजम निवासी प्राणनाथ ने बेटी प्रियंका की शादी चार फरवरी, 2013 को मैगलगंज निवासी रामजी रस्तोगी से की थी। आरोप है कि शादी के बाद अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर पति रामजी रस्तोगी, ससुर बुद्धसेन, सास रानी और अन्य ससुरालीजन प्रियंका को प्रताड़ित करने लगे।
आरोप है कि अतिरिक्त दहेज में मांगे गए 10 लाख रुपये नहीं मिलने पर 19 अगस्त, 2019 को ससुरालीजनों ने प्रियंका की हत्या कर उसे फंदे पर लटका दिया। पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हैंगिंग बताया गया था। पुलिस ने विवेचना पूरी कर पति, सास और ससुर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के दौरान सास रानी की मौत हो गई। अभियोजन ने मृतका के पिता प्राणनाथ, भाई राहुल रस्तोगी, डॉक्टर मोहम्मद कामरान रुश्दी, एसआई सेटूलाल, नायब तहसीलदार श्रीराम गौड़, एएसपी सुतांशु कुमार और माया देवी को गवाह बनाया।
बचाव पक्ष ने कोई गवाह पेश नहीं किया। झूठा फंसाने की दलील देते हुए कहा कि मृतका को इलाज के लिए सीतापुर अस्पताल ले जाया गया था। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि यदि उसे फंदे से उतारकर जीवित अवस्था में ले जाया गया था तो मैगलगंज के किसी डॉक्टर या नर्सिंग होम में क्यों नहीं ले गए। लंबी दूरी तय कर मृत अवस्था में सीतापुर अस्पताल की मोर्चरी ले जाने के बाद वहां से क्यों भाग गए।
शनिवार को अदालत ने रामजी रस्तोगी और बुद्धसेन को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।