लखीमपुर खीरी। कोरोना की दूसरी लहर में जहां कई मरीज ऑक्सीजन के अभाव में मर गए, वहीं तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच जिला अस्पताल में इस बार भी ऑक्सीजन प्लांट नहीं लग पाएगा। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बिना ऑक्सीजन प्लांट के कोरोना की तीसरी लहर से लड़ाई आखिर कैसे लड़ी जाएगी।
जिला अस्पताल में विधायक निधि से लगने वाला प्लांट नकहा सीएचसी ट्रांसफर कर दिया गया था। हालांकि तत्कालीन डीएम शैलेंद्र सिंह ने इस पर यह दलील दी थी कि जिला अस्पताल में गेल ऑक्सीजन का प्लांट लगाएगी। बाद में गेल ने भी अपने प्लांट को दूसरे जिले में ट्रांसफर कर दिया। ऐसी स्थिति में अब जिला अस्पताल में ऑक्सीजन का प्लांट नहीं लग पाएगा।
वहीं स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के अस्पताल का निर्माण जिला अस्पताल परिसर में ही होगा, इसलिये तब ऑक्सीजन प्लांट लगेगा। अब सवाल है कि बिना ऑक्सीजन प्लांट के कोरोना की तीसरी लहर से कैसे निपटा जाएगा।
मेडिकल कॉलेज निर्माण में प्रस्तावित है ऑक्सीजन प्लांट
स्वास्थ्य विभाग के लोग बताते हैं कि मेडिकल कॉलेज की तीन मंजिला अस्पताल की इमारत जिला अस्पताल में बनेगी। इसके लिए 8000 लीटर पर मिनट की क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगेगा। इसलिए गेल की ओर से लगने वाला प्लांट दूसरे जिले को दे दिया गया है। उधर, अस्पताल के लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज निर्माण में अभी लंबा समय है। अस्पताल की बिल्डिंग टूटनी है, जिसकी अनुमति तक अभी नहीं मिली। यह कब टूटेगी, मेडिकल कॉलेज का निर्माण कब शुरू होगा और कब यह प्लांट लगेगा, यह तक स्पष्ट नहीं है, जबकि विशेषज्ञ अगस्त में तीसरी लहर की आशंका जता रहे हैं। ऐसे में बिना ऑक्सीजन के आखिर कोरोना से लड़ाई कैसे लड़ी जाएगी। संवाद
मोतीपुर में 200 बेड का अस्पताल भी नहीं तैयार
तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने ओयल के मोतीपुर में निर्माणाधीन 200 बेड के मातृ एवं शिशु अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाने का निर्णय लिया था और यहां भी ऑक्सीजन प्लांट लगना था, लेकिन यहां भी अभी तक ऑक्सीजन प्लांट नहीं लग सका है।
सदर विधायक ने अपनी निधि से ऑक्सीजन प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया था। मगर, बाद में मालूम हुआ कि गेल इंडिया प्लांट लगाएगी। इसके लिए ब्लड बैंक के पीछे जगह चिह्नित कर चबूतरा भी तैयार हो गया था, लेकिन काफी दिनों से प्लांट के संबंध में कार्यदायी संस्था के लोगों ने संपर्क तक नहीं किया। प्लांट लगेगा भी कि नहीं इसके बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है।
- डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल