भाकियू चढ़ूनी के अध्यक्ष गुरुनाम सिंह चढ़ूनी को पुलिस लखीमपुर खीरी जाने से नहीं रोक सकी। वह वेश बदलकर पैदल कई किलोमीटर चलकर लखीमपुर खीरी पहुंच गए। आमतौर पर कुर्ता पायजामा पहनने वाले चढ़ूनी पैंट शर्ट में पुलिस को छका कर निकल गए ।
सामान्य दिनों में कुर्ता पायजामा पहनकर हरी और केसरिया रंग की पगड़ी धारण करने वाले भाकियू चढ़ूनी के अध्यक्ष गुरुनाम सिंह चढ़ूनी सोमवार को दिल्ली से लखीमपुर के लिए चले तो मेरठ में रोक लिए गए । इस पर चढ़ूनी को वापस होना पड़ा लेकिन मंगलवार को दिल्ली के कुंडली बॉर्डर से वह वेश बदल कर निकले। सर्विंलांस के डर से मोबाइल फोन छोड़ दिया।
हरियाणा के कार्यकर्ताओं को संग लेकर दिल्ली से चले चढ़ूनी बचते बचाते पीलीभीत जिले के गजरौला थाना क्षेत्र तक पहुंच गए । उस वक्त रात के डेढ़ बजे थे। असम हाईवे पर गजरौला थाने के बाहर बैरियर लगाकर पुलिस चेकिंग कर रही थी। चार-पांच ट्रक पहले से खड़े थे। इन ट्रकों के पीछे ही उनकी दो गाड़ियां खड़ी हो गईं। चढ़ूनी ने देखा कि पुलिस उनकी अगली गाड़ी में टार्च लगाकर लोगों के चेहरे देख रही है। अगर पुलिस पीछे आई और उन्हें पहचान लिया तो रोक सकती है। रोके जाने के अंदेशे में ही चढ़ूनी उतरकर कर सड़क के किनारे खड़े होकर नजारा देखने लगे।
जब तक पुलिस सतर्क होती तब तक वह खेतों की ओर बढ़ गए। पुलिस ने हरियाणा का नंबर होने की वजह से उनकी दोनों गाड़ियों के साथ सात समर्थकों को रोक लिया। जब चढ़ूनी के बारे में पूछा तो कार्यकर्ता कुछ भी बताने से परहेज कर गए । इस बीच चढ़ूनी खेत खलिहान और गांव के रास्ते आगे बढ़ गए । रास्ते में टेंपो और बाइक सवार की मदद ली। कई किलोमीटर पैदल भी चले। रात के अंधेरे में अकेले का यह सफर उन्हें पूरे जीवन याद रहेगा लेकिन मजबूरी थी इसलिए चलते चले गए क्योंकि पुलिस उन्हें रोकना चाहती थी।
चढ़ूनी ने बताया कि अगर वेश बदल कर पैदल न चला होता तो पुलिस उन्हें लखीमपुर खीरी तक न जाने देती। उन्होंने बताया कि वह आमतौर पर कुर्ता पायजामा ही पहनते हैं लेकिन वेश बदल कर पैंट शर्ट में निकले। पगड़ी भी सफेद पहनी ताकि कोई पहचान न पाए। उन्होंने यह भी बताया कि उनके समर्थकों और गाड़ियों को पुलिस ने 11 घंटे बाद बुधवार को दोपहर 12 बजे छोड़ दिया। तब तक चढ़ूनी नानपारा बहराइच पहुंच गए थे। नानपारा से वह लखीमपुर पहुंचे। वहां से बृहस्पतिवार को अपनी गाड़ी में सवार होकर दिल्ली के लिए रवाना हुए।