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घास मैदानों के प्रबंधन से वन्यजीवों की संख्या बढ़ी

Tue, 24 Mar 2015 05:41 PM IST
लखीमपुर खीरी
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दक्षिण खीरी वनप्रभाग में घास के मैदानों के प्रबंधन से शाकाहारी जीवों के लिए अनुकूल वातावरण बना है। इस प्रभाग के जिन क्षेत्रों में ग्रासलैंड मैनेजमेंट किया गया है वहां शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या में इजाफा हुआ है। जरूरी नहीं है कि जंगल में वन्यजीवों की आबादी बढ़ी हो लेकिन जिन घास के मैदानों को सुधारा गया है वहां इन जीवों की संख्या बढ़ी है। इससे बाघों के लिए क्षेत्र का विस्तार भी हुआ है।  
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संरक्षित वनक्षेत्र से वाहर वन्यजीव प्रबंधन योजना के तहत पिछले वित्तीय वर्ष में दक्षिण खीरी वनप्रभाग को 100 हेक्टेयर घास के मैदान के विकास के लिए राज्य सरकार से तीन लाख रुपया मिला था। इससे गोला रेंज के पनसब्बी बीट में 50 हेक्टेयर और भीरा रेंज के उत्तरी किशनपुर और मैलानी के महुरेना बीट में 25-25 हेक्टेयर घास के मैदानों का विकास किया गया। इसके अलावा भीरा रेंज के किशनपुर उत्तरी, हीरापुर और दक्षिण भीरा में भी वन विभाग ने घास के मैदानों का भी विकास किया है। इसके सार्थक परिणाम दिखाई दे रहे हैं।
डीएफओ साउथ नीरज कुमार का दावा है कि ग्रासलैंड मैनेजमेंट के बाद यहां हिरनों की संख्या बढ़ी है। इससे पहले यहां कभी-कभार हिरनों के छोटे झुंड दिखाई देते थे, अब यहां हिरनों के बड़े झुंड आसानी से देखे जा सकते हैं। हिरन आदि शाकाहारी जीवों की संख्या बढ़ने से यहां बाघ और तेंदुओं के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध हो रहा है। ग्रासलैंड मैनेजमेंट से बाघ और तेंदुआ जैसे दुर्लभ जीवों के प्राकृतिक आवास को भी विस्तार मिल रहा है।
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डीएफओ साउथ खीरी नीरज कुमार ने बताया कि जंगल में वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक आवास और भोजन उपलब्ध कराने के लिए वनक्षेत्र में घास के मैदान विकसित किए गए हैं। इसके सार्थक परिणाम सामने आए हैं। वन्यजीवों के लिए पानी के इंतजाम के लिए तालाब-पोखरों के पास बोरिंग कराई जा रही हैं।
ऐसे होता है ग्रासलैंड मैनेजमेंट
-वन विभाग माह जनवरी-फरवरी में घास के मैदानों में सूखी घास में आग लगाता है। इसके बाद मैदान में अच्छी हरी घास उगती है
-आग लगाने के बाद घास के मैदान को ट्रैक्टर से जोत कर छोड़ दिया जाता है। इससे नर्म हरी घास उग आती है
-कभी-कभी घास की कटाई कराने के बाद नीचे बची घास को जलाने के बाद उसे ट्रैक्टर से जोत कर डाल दिया जाता है। इससे भी अच्छी घास निकलती है
गर्मियों में सूखे तालाब, पोखर भरे जाएंगे
गर्मियों के मौसम में कड़ी धूप से अक्सर जंगल के अंदर के तालाब और पोखर सूख जाते हैं। जंगली जानवरों को जंगल के अंदर पानी की दिक्कत न हो और उन्हें पानी की तलाश में बाहर न निकलना पड़े इसके लिए वन विभाग ने कई तालाबों के पास बोरिंग कराई है। तालाब सूख जाने पर बोरिंग के जरिए इन तालाबों को भरा जाता है। इस बार दक्षिण खीरी वन प्रभाग ने एक दर्जन जगहों पर बोरिंग कराने के लिए प्रस्ताव भेजा है।
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