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खुले में शौच मुक्त होने पर गांवों को मिलेगा अनुदान

Tue, 10 May 2016 10:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो-लखीमपुर खीरी।
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लखीमपुर - फोटो : अमर उजाला
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- स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों मेें चलाया अभियान
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- 2019 तक जिले को खुले में शौैच मुुक्त करने का लक्ष्य
- गांवों में निगरानी समितियां ग्रामीणों को करेंगी जागरूक
खुले में शौच जाने की मानसिकता को तोड़ने के लिए पंचायत राज विभाग ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच मुक्त अभियान चलाया हैै। 2019 तक जिले को खुले में शौच की परंपरा से मुक्त कराने के लिए गांवों में निगरानी समितियों का गठन किया गया है। अभियान से प्रेरित होकर खुले में शौच मुक्त होने वाली ग्राम पंचायतों को सरकार ने अनुदान देने का फैसला किया है, जिसमें 150 परिवार वाले गांवों को सात लाख, 300 परिवार वाले गांवों को 12 लाख, 500 परिवार वाले गांवों को 15 लाख और 500 से अधिक परिवार वाले गांवों को 20 लाख की धनराशि दी जाएगी। 
इस अभियान के तहत डीपीआरओ ने तीन डीपीसी (जिला स्वच्छता समन्वयक) के नेतृत्व में टीमें गठित कर दी हैं, जो गांवों में निगरानी समितियों का गठन करेंगी। समिति में ग्रामीणों के अलावा गांव की आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम, शिक्षक और पंचायत सदस्य को भी शामिल किया जाएगा। यह समितियां प्रतिदिन सुबह चार बजे से मूवमेंट पर रहकर खुले में शौच करने वालों को घर में शौचालय बनवाने के लिए जागरूक करेंगी और साथ ही खुले में शौच से मानव स्वास्थ्य को होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देंगे। इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला पंचायत राज विभाग ने 40 सफाईकर्मियों और स्वच्छता प्रेरकों को ट्रेनिंग भी दी है, जो गांवों में ग्रामीणों के संग खुली बैठक कर शौचालय के प्रयोग पर जोर देंगे। इसके लिए वर्ष 2016-17 में कुल एक लाख शौचालय बनवाने का लक्ष्य विभाग ने बनाया है, जिसमें 50 हजार शौचालय के लिए सरकार से अनुदान मांगा गया है। शेष शौचालयों का निर्माण ग्रामीणों को प्रेरित कर उन्हीं से बनवाया जाएगा। 
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प्रधान और सफाईकर्मियों के घर में नहीं शौचालय
बेहजम ब्लाक के गांव मुकरेहटा, पलिया के धुस्किया, रामनगर, खुरेहना, लखीमपुर के सकतापुर समेत करीब 20 गांवों में अभियान की शुरुआत हो गई है। सूत्र बताते हैं कि कई ग्राम प्रधान और सफाईकर्मियों के घरों में शौचालय नहीं बने होने की सूचना विभाग को मिली है, जिस संबंध में डीपीआरओ ने सभी ब्लाकों के एडीओ पंचायत से सूचना मांगी है। 

लक्ष्य के मुकाबले नहीं हो रहा शौचालय निर्माण
खुले में शौच मुक्त करने के लिए अभियान अच्छी पहल है, लेकिन शौचालय निर्माण में अपेक्षित तेजी नहीं आ पा रही है। 2012 के बेसलाइन सर्वे में जिले के चार लाख परिवारों के घरों में शौैचालय नहीं बने थे। अभी भी जिले के करीब तीन लाख परिवारों के घरों में शौचालय नहीं बने हैं। वर्ष 2015-16 में लक्ष्य 39,259 के सापेक्ष 18,533 शौैचालय बनाए जा सके हैं, जिसमेें सरकार ने 8085 शौचालय निर्माण के लिए अनुदान दिया गया। इस वर्ष लक्ष्य बढ़ाकर एक लाख जरूर किया गया है, लेकिन एक माह बीतने के बाद अभी इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है। 
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खुले में शौच मुक्त अभियान की शुरुआत गांवों से की गई है, जिसमें व्यापक स्तर पर ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए बैठक से लेकर निगरानी का कार्य किया जा रहा है। निगरानी समिति के लोग सुबह चार बजे से ही घरों से निकलकर खुले में शौच करने वाले ग्रामीणों को जागरूक करने के काम में लगे हैं। जल्द ही सभी 1167 ग्राम पंचायतों में निगरानी समितियां गठित कर दी जाएंगी।  - सुधीर कुमार श्रीवास्तव, डीपीआरओ
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