लखीमपुर खीरी। संपत्ति के लालच में बाबा की हत्या करने वाले पोते को एडीजे अनिल सिंह राना ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
पसगवां थाना क्षेत्र में गांव नरदी निवासी मेवाराम की 42 बीघा जमीन के लिए उनके परिवार में साजिश और कूटनीति का दौर चल रहा था। मेवाराम ने अपनी कुछ जमीन अपने एक पोते सतीश को खेती बाड़ी के लिए दे रखी थी। इससे पुत्र ओमप्रकाश को आशंका हुई कि कहीं पिता मेवाराम उसको जमीन न लिखा दे। 11 अप्रैल, 2005 को 10 बजे ओमप्रकाश अपने लड़के नीरज के साथ पहुंचा और मेवाराम से साथ चलने और रहने के लिए कहा, लेकिन मेवाराम तैयार नहीं हुए तो कहासुनी होने लगी।
ओमप्रकाश ने अपने लड़के नीरज के साथ मिलकर तमंचे से मेवाराम को गोली मार दी। बाद में चाकू से मेवाराम का गला रेतने लगा। चीख पुकार मची तो सतीश की पत्नी सरिता ने बचाने के लिए शोर मचाया और भीड़ एकत्रित होने लगी। इसके बाद ओमप्रकाश अपने लड़के नीरज के साथ जंगल की तरफ भाग गया। पुलिस ने जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद मेवाराम को इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा, लेकिन रास्ते में ही मेवाराम ने दम तोड़ दिया।
पुलिस ने ओमप्रकाश को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया था, जबकि नीरज को तीसरे दिन पकड़ा। दूसरे पोते सतीश कुमार ने नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अदालती सुनवाई के दौरान सतीश कुमार, सरिता देवी, कांस्टेबल रामप्रकाश एक्स-रे टेक्नीशयन रामराज सिंह, रामप्रदीप यादव और राम अवतार ने अपने बयान दर्ज कराए थे।
अदालत ने 20 साल पुराने इस मामले में मंगलवार को फैसला सुनाते हुए नीरज को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मुकदमे में सुनवाई के दौरान ओम प्रकाश की पहले ही मौत हो चुकी है।