धौरहरा। ब्लॉक ईसानगर के चकदहा गांव में घाघरा नदी का कटान अब घरों के दरवाजे तक पहुंच गया है। बीते 24 घंटे में नदी करीब 20 घरों के बेहद नजदीक पहुंच गई।
खतरे को देखते हुए ग्रामीण घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं। आरोप है कि कटान लगातार बढ़ने के बावजूद तहसील प्रशासन और बाढ़ खंड विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस बचाव कार्य शुरू नहीं किया गया है।
घाघरा नदी अब तक फसलों समेत करीब 160 हेक्टेयर जमीन निगल चुकी है। अब नदी तेजी से आबादी की ओर बढ़ रही है। गांव के सुंदर और श्रीपाल आदि ग्रामीणों ने बताया कि सुंदरलाल, श्रीपाल, रमेश, कुनकुन, भानू, शुभम, सुरेश, रामलखन, सतनाम और छोटू समेत करीब 20 परिवारों के घर कटान की जद में हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि कटान इसी गति से जारी रहा तो घर कभी भी नदी में समा सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि तहसील प्रशासन की ओर से कई बार आश्वासन दिया गया, लेकिन मौके पर बचाव कार्य शुरू नहीं कराया गया। इससे प्रभावित परिवारों में दहशत है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल बचाव कार्य शुरू कराने और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की मांग की है।
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सधुआपुर में 100 हेक्टेयर से अधिक जमीन नदी में समाई
ईसानगर के सधुआपुर गांव निवासी नरेंद्र सिंह, कुंवर सिंह, खेमकरन, मूलचंद, दीपू सिंह, त्रिलोकी, प्रसादी, सचिन कुमार, राजेंद्र, रामसरे, महावीर, समरबहादुर सिंह, तारावती, कमलेश, मूलचंद आदि करीब 30 किसानों की 100 हेक्टेयर से अधिक भूमि फसलों समेत नदी में समा चुकी है। किसानों का आरोप है कि अभी तक तहसील प्रशासन ने उन्हें कोई सहायता नहीं दी है।
बाढ़ खंड विभाग को बचाव कार्य के लिए पत्र लिखा है। परियोजना स्वीकृति के बाद तुरंत बचाव कार्य शुरू कराया जाएगा। जिन किसानों की फसल समेत जमीन कटी है। लेखपालों से सर्वे कराकर नियमानुसार सहायता दी जाएगी। पलायन कर रहे लोगों को ऊंचे स्थानों पर बसाया जाएगा।
-राशिकृष्णा, एसडीएम धौरहरा