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बाछेपारा गांव का वजूद मिटाने पर तुली घाघरा, 20 घर नदी में समाए

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धौरहरा। तहसील क्षेत्र के रमियाबेहड़ में घाघरा नदी की विनाशलीला थमने का नाम नहीं ले रही है। घाघरा नदी बाछेपारा गांव का वजूद मिटाने पर तुली है। नदी की तेज लहरों के कारण बाढ़ खंड का कराया गया बचाव कार्य पानी में बहता जा रहा है। नदी धीरे-धीरे घरों को काटकर गांव का वजूद मिटाने को बेताब है। कटान पीड़ितों का आरोप है कि प्रशासन से कोई मदद नही मिल रही है कड़ी धूप में परिवार सहित खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हैं।
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बुधवार की रात से बृहस्पतिवार को दोपहर तक घाघरा नदी ने बाछेपारा के रमेश, बालकराम, उत्तम, मेवालाल, मथुरा, रामप्रसाद, दुबरि, संतोष, परशुराम, राजेश, रामधार पैकरमा, सुरेंद्र राममूर्ति, रामकुमार, गयाप्रसाद, सुमेर, बंसीलाल आदि के घर नदी में समा गए हैं। वहीं श्रीराम, श्रीकेशन, मिलन, हीरालाल, संतोष, राजीव, अमरीका, विश्राम, मोतीलाल, रामगुनी,हरिश्चंद्र, लक्ष्मी नारायण सहित 35 घर जो शेष बचे हैं वह भी कभी भी नदी की चपेट में आ सकते हैं।
कटान पीड़ित खुले आसमान के नीचे भूखे पेट रहने को विवश हैं, जबकि तहसील प्रशासन कटान पीड़ितों के खाने व रहने की व्यवस्था का दावा कर रहा है। कटान पीड़ितों का आरोप है कि एक दिन एसडीएम और तहसीलदार ही आए थे उसके बाद से कोई भी अधिकारी व जनप्रतिनिधि हाल जानने नहीं आया है। अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड शारदा नगर राजीव कुमार ने बताया कि जहां भी कटान हो रहा है वहां बचाव कार्य चल रहा है। जलस्तर ज्यादा होने से बचाव कार्य मे दिक्कत आ रही है।
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