लखीमपुर खीरी। शहर की ऐतिहासिक रामलीला में राम-सीता विवाह के दिन मथुरा भवन में प्रभु राम का स्वरूप धारण करने वाले पात्र को दूल्हे की तरह सजाया जाता है।
शृंगार से लेकर विवाह की शुरुआती रस्मों तक की जिम्मेदारी आयोजक सेठ परिवार की महिलाएं निभाती हैं। उनके हाथों से निभाई जाने वाली यह परंपरा अवध के विवाह संस्कारों और लोक संस्कृति की झलक पेश करती है।
सेठ गया प्रसाद ट्रस्ट के सर्वराहकार विपुल सेठ के अनुसार, यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार प्रभु राम का शृंगार करती हैं। इसके बाद जनकपुरी से बारात का निमंत्रण लेकर लोग मथुरा भवन पहुंचते हैं। निमंत्रण मिलने पर भगवान राम अपने भाइयों और बारातियों के साथ रथ पर सवार होकर जनकपुरी के लिए रवाना होते हैं। मेला मैदान में बनी जनकपुरी में तुलसी व सालिग्राम का विवाह होता है। बृहस्पतिवार को शहर में राम बरात निकलेगी।