एसडीएम ने बयान के लिए जारी किया नोटिस, सीओ ने जांच एसपी को भेजी
भूमिहीनों के खाते में गेहूं बिक्री का पैसा जमा करने और निकालने का मामला
निघासन। जिला सहकारी बैंक की तिकुनियां शाखा में खाता खोलकर गेहूं बिक्री का एक करोड़ से अधिक रुपया निकालने के मामले में डीएम ने एसडीएम, एसपी ने सीओ और सहायक निबंधक ने दो अपर जिला सहायक अधिकारी और बैंक के दो अधिकारियों को लगाया है। एसडीएम श्रद्धा सिंह ने शिकायतकर्ताओं और बैंक मैनेजर समेत तीन लोगों को नोटिस जारी कर बयान के लिए बुलाया है। उधर, सीओ एसके जायसवाल ने जांच कर मामले की रिपोर्ट एसपी को भेजी है।
निघासन तहसील के गौरिया और दरेरी के 70 लोगों के राशनकार्ड पूर्ति विभाग ने इसलिए निरस्त कर दिया था कि उनके खाते में लाखों रुपये गेहूं बिक्री का आया था। इस बात की भनक उन लोगों को नहीं थी कि उनके नाम खाता खुलकर पैसा निकल भी गया है। मिथलेश, अमीना, साबिरा समेत 70 लोगों ने डीएम, एसपी, एसडीएम और जिला सहकारी बैंक में शिकायत की थी।
प्रथम दृष्टया जांच में दोषी पाए जाने पर मैनेजर गिरजादयाल राना, कैशियर शोभित वर्मा और सतीश सिंह को दोषी मानते हुए वहां से हटा दिया गया था। उधर, एसडीएम श्रद्धा सिंह ने करीब दस लोगों को नोटिस जारी किए हैं।
सीओ एसके जायसवाल ने बताया कि इस प्रकरण की जांच की गई, जिसमें काफी गड़बड़ियां मिली हैं। जांच रिपोर्ट एसपी को भेजी गई है। उधर, सहायक निबंधक सूर्यनरायण मिश्रा ने अपर जिला सहायक अभियंता शंकर लाल और धीरेंद्र प्रताप यादव को जांच के लिए लगाया है। शंकर लाल ने बताया कि काम की अधिकता के करण जांच करने नहीं पहुंचा हूं। गंभीर प्रकरण है मामले की हर बिंदुओं पर जांच होगी।
खाता खुलने में हुए फर्जीबाडे़ की जांच कराई जा रही है। उसके बाद किस विभाग से गेहूं का भुगतान भेजा गया है। इसकी भी जांच की जाएगी। जांच में दोषियों को कतई बक्शा नहीं जाएगा।
- सूर्यनराण मिश्र, सहायक निबंधक सहकारिता विभाग
दोषियों को ही सौंप दी जांच : राजीव
निघासन। प्रसपा प्रदेश सचिव राजीव गुप्ता ने कहा कि साधन सहकारी समिति की तरफ से गेहूं क्रय केंद्र तिकुनिया में लगाया गया था और मामले की जांच भी उसी विभाग को सौंपी गई है। जब वह स्वयं अपनी जांच करेंगे तो निष्पक्ष जांच कैसे संभव है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के वकील को सारे कागज दे दिए गए हैं। उन्होंने इस मामले में दो दिनों के अंदर जनहित याचिका दायर करने का दावा किया।
राजीव गुप्ता ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर प्रकरण है। यदि सही से जांच हो गई तो इसके सत्तापक्ष के दो नेता और जिले के बड़े अधिकारी भी फंसेंगे। गौरिया, दरेरी, परमोधापुर आदि गांवों में कार्ड निरस्त हो गए है, जिसे लेकर वह लोग भटक रहे हैं। यही घोटाला यदि किसी साधारण व्यक्ति ने किया होता तो शायद वह अब तक जेल में होता। उन्होंने कहा कि जिले में धान और गेहूं खरीद की जांच की जनहित याचिका दायर की जाएगी।