मंदिर को बचाने के लिए किए जा रहे प्रयास
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'हमारी पीड़ा कोई सुनने वाला नहीं'
गांववालों का कहना है कि कोई भी जनप्रतिनिधि झांकने नहीं आया। हम अपनी पीड़ा किसे कहें कोई सुनने वाला नहीं है। सिंचाई विभाग के अधिकारी अगस्त महीने में गांव की जमीन का कटान हो जाने के बाद बीते माह सितंबर में आए थे। बांस का काम शुरू किया था। इसके बाद नदी की धारा कम हो जाने पर 15 दिन पहले ही चले गए। तब नदी में पानी कम हो गया था और बाढ़ भी नहीं थी।
गिरिजापुरी बैराज के गेट खुलने से अचानक पानी आने से नदी फिर उफना गई है। एक हफ्ते से हो रहे कटान के कारण पूरा गांव नदी की चपेट में आ गया है। वहीं सिंचाई विभाग के अवर अभियंता मुसाफिर ने बताया कि अब कटान नहीं हो रहा है। ग्रामीण दहशत में हैं, जिसके चलते बोरियों में मिट्टी भरकर किनारे पर लगाने का काम शुरू कर दिया है।