सैलानियों को उपलब्ध कराई जाएगी प्राथमिक चिकित्सा सुविधा
दुधवा नेशनल पार्क के नवीन पर्यटन सत्र में इस बार सैलानियों को प्राथमिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी भी पार्क प्रशासन द्वारा की जा रही है। इसको लेकर गाइडों को प्रशिक्षण दिया गया है और उनके साथ जिप्सी में फर्स्ट एड बॉक्स रखने के भी निर्देश दिए गए हैं। गाइडों को लगातार दिशा निर्देश भी पार्क प्रशासन की तरफ से दिए जा रहे हैं। संवाद
कहानियां सुनाने के साथ ही वन्यजीवों के बारे में किया जाएगा जागरूक
दुधवा नेशनल पार्क के इस नवीन पर्यटन सत्र में गाइडों द्वारा सैलानियों को दुधवा से संबंधित कहानी सुनाई जाएगी। जिसमें सरीसृपों के साथ ही वन्यजीवों और बाघों के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। इसके अलावा दुधवा के विख्यात एक सींग वाले गैंडे के बारे में भी जानकारियां दी जाएगी। गाइडों के द्वारा दूरदराज से आने वाले सैलानियों को अन्य कई जानकारियां भी उपलब्ध कराई जाएगी।
प्लास्टिक और पॉलिथीन का प्रयोग रहेगा प्रतिबंधित
नेशनल पार्क में इस पर्यटन सत्र में पार्क प्रशासन द्वारा प्लास्टिक और पॉलिथीन का प्रयोग भी वर्जित किया जा रहा है। इसको लेकर दुधवा में प्लास्टिक की बोतल और पॉलिथीन का प्रयोग भी बंद करने के लिए पार्क प्रशासन द्वारा दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इसके लिए दुधवा बैरियर, पार्क पर्यटन के मुख्य द्वार और जंगल सफारी के मुख्य द्वार पर चेकिंग के बाद ही सैलानियों को जंगल भ्रमण के लिए जाने दिया जाएगा।
मोहम्मदी का टूरिस्ट सर्किट भी तैयार
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी (महेशपुर) रेंज का नया पर्यटन सत्र छह नवंबर से शुरू होने जा रहा है। इस सत्र में पर्यटक नई सुविधाएं का लाभ उठा सकेंगे। सत्र का शुभारंभ लखनऊ मंडल की मुख्य वन संरक्षक रेनू सिंह करेंगी।
वन विभाग ने प्रवेश द्वार, स्वागत कक्ष, रेस्ट हाउस, दो हट, चार मचान, शौचालय और नेचर ट्रेल का निर्माण कराया है। वहीं एक कैंटीन और सेविनियर शॉप का भी निर्माण कराया है। इस सत्र में सैलानियों के भ्रमण के लिए दो जिप्सी भी लगाई गईं हैं।
मोहम्मदी रेंज के देवीपुर बीट के 16 किलोमीटर को पर्यटन क्षेत्र बनाया गया है। सैलानी रेस्ट हाउस या हट में ठहर कर जंगल में विश्राम का आनंद ले सकेंगे। साथ ही नेचर ट्रेल पर पैदल भ्रमण, जिप्सी पर सवार होकर अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य व दुर्लभ वन्यजीवों का दीदार कर सकेंगे। जंगल तीन हजार हेक्टेयर में फैला है और यहां करीब बीस बाघ हैं।