दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन ने चलतुआ गांव के निकट जंगल में रविवार शाम ग्रामीणों द्वारा पीट-पीटकर एक बाघिन की हत्या करने के मामले में सोमवार को पीलीभीत जिले के थाना सेहरामऊ उत्तरी में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने वन विभाग की तहरीर पर चलतुआ गांव निवासी आठ लोगों के खिलाफ बाघिन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। दुधवा नेशनल पार्क उप-निदेशक महावीर कौजलगि और वन्यजीव प्रतिपालक एसके अमरेश के निर्देश पर वन रक्षक मोहनराम ने थाना सेहरामऊ उत्तरी पुलिस को तहरीर दी है।
पुलिस को दी तहरीर में वन रक्षक ने ग्रामीणों पर जंगल के अंदर बाघिन को घेरकर भाले, फावड़े और लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मार डालने का आरोप लगाया है। वन रक्षक की तहरीर पर थाना सेहरामऊ उत्तरी पुलिस ने चलतुआ गांव निवासी बबलू, मुकेश, लालबहादुर, चौथी, सुभाष, राम कुल्फ, ओमप्रकाश के अलावा अन्य कई अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ घटना की रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
उधर, थाना सेहरामऊ उत्तरी के प्रभारी इंस्पेक्टर अतर सिंह ने बताया कि वन रक्षक की तहरीर के आधार पर जंगल के अंदर बाघिन की हत्या किए जाने के मामले में चलतुआ गांव निवासी आठ आरोपियों सहित कई अन्य अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि बाघ हत्या मामले में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उधर, दुधवा टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक महावीर कौजलगि ने बताया कि चलतुआ जंगल के अंदर ग्रामीणों द्वारा बाघिन की हत्या किए जाने का मामला वन विभाग में भी दर्ज किया गया है। इसमें चलतुआ गांव निवासी आठ लोग और कई अन्य ग्रामीणों पर वन्यजीव अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघ की जगह निकली बाघिन
किशनपुर सेंक्चुरी से सटे चलतुआ गांव में एक ग्रामीण की मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने हमला कर बाघ को मार डाला था, लेकिन यह बाघ नहीं बाघिन थी। सोमवार को उसका दुधवा मुख्यालय पर पोस्टमार्टम किया गया। जिसमें उसके बाघिन होने की पुष्टि हुई। पहले इसे पोस्टमार्टम के लिए बरेली ले जाना तय हुआ था लेकिन बाद में यहीं पर इसके पोस्टमार्टम की तैयारियां शुरू की गईं।
आईवीआरआई बरेली से आए चिकित्सक के साथ ही तीन डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया तो बाघ की जगह बाघिन होना बताया। पोस्टमार्टम में इंजरी से बाघिन की मौत होना बताया जा रहा है। पीएम के दौरान अधिकारियों का जमावड़ा लगा रहा। आईवीआरआई बरेली से आए चिकित्सक डॉ. करीकरन, लखनऊ के डॉ. उत्कर्ष शुक्ला, डब्ल्यूटीआई के डॉ. दक्ष गंगवार, डॉ. जेबी सिंह के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया।
जिसमें बाघिन होने की पुष्टि हुई और इंजरी होने से उसकी मौत होना बताया जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक साइड के कुछ दांत भी टूटे हुए हैं और गंभीर चोटें आई हैं। पोस्टमार्टम के दौरान पीसीसीएफ के प्रतिनिधि के तौर पर पीलीभीत टाइगर रिजर्व के एफडी एस राजा मोहन, एनटीसीए के प्रतिनिधि के तौर पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ. मुदित गुप्ता, एफडी रमेश कुमार पांडेय, डीडी महावीर कौजलगि आदि मौजूद रहे।डीडी महावीर कौजलगि ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद सक्षम अधिकारियों की मौजूदगी में बाघिन के शव को जला दिया गया है। एनटीसीए की गाइडलाइन के अनुसार जलाया गया है।
लगभग पांच साल की थी बाघिन
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि मृत बाघिन की उम्र करीब पांच से साढ़े पांच साल थी। वह पूरी तरह हृष्टपुष्ट थी। भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ ही उसे मार सकती थी।