जिला महिला अस्पताल में बना एसएनसीयू। संवाद
लखीमपुर खीरी। जिला महिला अस्पताल में एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबाॅर्न केयर यूनिट) की स्थापना के 13 साल बाद भी सिर्फ 10 बेड ही हैं। अधिकांश यह वार्ड फुल रहता है। इस कारण प्री मैच्योर बेबी को लखनऊ रेफर किया जा रहा है या फिर निजी अस्पताल में तीमारदार जाने के लिए मजबूर हैं।
जिला महिला अस्पताल में 50 बेड की क्षमता है। प्री मैच्याेर बच्चों के लिए वर्ष 2012 में 10 बेड का एसएनसीयू वार्ड बनाया गया था, जबकि दो बेड इमरजेंसी में अतिरिक्त हैं। वर्तमान में भी इतने ही बेड हैं। अभी के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 20-30 महिलाओं का प्रसव होता है। इसमें कई बच्चे कम वजन के होते हैं।
ऐसे में उन्हें एसएनसीयू में भर्ती कराया जाता है। अस्पताल में प्रसव की संख्या अधिक होने से प्री-मैच्योर बेबी का ग्राफ भी बढ़ रहा है, लेकिन एसएनसीयू में बेड की संख्या कम होने से यह वार्ड अधिकांश फुल रहता है। ऐसे में कई बेबी को लखनऊ भेजना पड़ता है या फिर तीमारदार निजी अस्पतालों की शरण लेने के लिए मजबूर होते हैं।
इसलिए पड़ती है जरूरत
-गंभीर स्थिति में पैदा होने वाले नवजातों के लिए एसएनसीयू वार्ड की आवश्यकता पड़ती है। अक्सर देखा जाता है कि पैदा होने के बाद एक महीने तक नवजातों को सांस लेने में तकलीफ होती है या मानक के अनुरूप कम वजन रहता है। ऐसे उन्हें इस वार्ड में भर्ती किया जाता है। जिला महिला अस्पताल के डॉ. अनिल वर्मा ने बताया कि एक किलोग्राम का बच्चा होने पर करीब 25 दिनों तक उसे एसएनसीयू वार्ड की जरूरत पड़ती है।
एसएनसीयू में 10 बेड हैं, जबकि दो इमरजेंसी के लिए हैं। शिफ्ट के हिसाब से 24 स्टाफ नर्स की ड्यूटी भी लगाई है। इस वक्त प्रसव की संख्या बढ़ गई है। इसलिए ऐसी दिक्कतें सामने आ रही हैं। जल्द ही इससे निजात मिलेगी।
डॉ. ज्योति मेहरोत्रा, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल