बाढ़ राहत घोटाले की जांच पूरी करने में देरी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई
न होना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। बाढ़ राहत घोटाले के असली
सूत्रधारों पर कार्रवाई न होने से पीड़ित लोगों के अलावा किसानों और
जनप्रतिनिधियों में रोष है। उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है। लोगों का
कहना है कि घोटाले से जुड़े लोगों को बचाने का प्रयास हो रहा है।
क्षेत्रीय
लोगों का कहना है कि अब तक की जांच में यह बात साबित हो चुकी है कि बाढ़
राहत घोटाले में असली सूत्रधार की भूमिका लेखपालों के पैनल ने निभाई।
इन्होंने 50 चेक दलालों के हाथ बेच दिए जिन्होंने फर्जी आईडी के आधार पर
फेक एकाउंट बैंकों में खुलवाकर चेक कैश करा लिए। अब न लेखपालों पर कार्रवाई
हुई न फर्जी आईडी बनाने वालों पर। फर्जी खाता खोलने वाले बैंक भी अब तक
कार्रवाई से बाहर हैं।
मामले की शिकायत सीएम से होगी
बाढ़ राहत
घोटाले का मामला आइने की तरह साफ होने के बाद भी लेखपालों के खिलाफ
कार्रवाई न होना गलत है। कार्रवाई न करने से जांच अधिकारी की मंशा साफ नजर आ
रही है। इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे और इसकी उच्चस्तरीय
जांच कराई जाएगी।
-आरए उस्मानी, उपाध्यक्ष राज्य युवा कल्याण परिषद
दोषी लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई हो
बाढ़
राहत घोटाले की करीब डेढ़ माह से चल रही जांच में कोई भी नतीजा नहीं निकल
सका है। दोषी लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। यदि उनको सबक नहीं
मिला तो वे भविष्य में भी इस तरह के घोटाले करने से बाज नहीं आएंगे।
-अमन दीप सिंह, उपाध्यक्ष, सरयू सहकारी चीनी मिल
बैंक मैनेजर के खिलाफ दर्ज हो धोखाधड़ी की रिपोर्ट
बाढ़
राहत घोटाले में जितने दोषी लेखपाल हैं उससे कई गुना ज्यादा दोषी बैंक
कर्मचारी भी हैं। फर्जी आईडी पर खाता खोलने की संस्तुति करने वाले बैंक
मैनेजर के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज होनी चाहिए।
-नरेंद्र सिंह भदौरिया, किसान नेता
राजस्व मंत्री से होगी शिकायत
तहसील
में किसानों के साथ फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। इस घोटाले में जांच
अधिकारी से लेकर नीचे तबके के लोग शामिल हैं। लेखपाल और बैंक मैनेजर से
लेकर सभी संलिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इस मुद्दे को मंत्री
शिवपाल सिंह यादव के समक्ष रखूंगा।
-राजीव गुप्ता, सदस्य, जिला पंचायत