लखीमपुर खीरी।
चार दिन पहले रैक आने के बाद भी जिले की कई समितियों पर खाद का संकट बरकरार है। किसानों को जरूरत के अनुरूप यूरिया की बोरियां नहीं दी जा रही हैं। इसके लिए भी उन्हें लंबी-लंबी कतार में लगना पड़ रहा है।
सोमवार को अलीगंज समिति पर धक्कामुक्की से हालात इतने खराब हो गए कि पुलिस की निगरानी में वितरण कराया गया। वहीं, अफसर दोबारा से जल्द रैक आने का दावा कर रहे हैं। जिले में चार दिन पहले 2074.800 एमटी यूरिया की रैक आई थी। उस वक्त अफसरों ने दावा किया था कि दो से तीन दिन में समितियों पर खाद पहुंच जाएगी, लेकिन अब भी सुधार नहीं देखने को मिला। मितौली साधन सहकारी समिति पर खाद नहीं है। सचिव अर्चना सिंह ने बताया कि डिमांड गई है।
बरबर के सहकारी समिति पर यूरिया 550 बोरी है, लेकिन मैसेज न आने से वितरण नहीं हो सका। सचिव राहुल सिंह ने कहा कि मंगलवार को वितरण शुरू होगा। मोहम्मदी के राजापुर बैनी में काफी समय से खाद नहीं है। मैलानी समिति पर 600 बोरी यूरिया का वितरण कराया जा रहा, लेकिन डीएपी नहीं है।
उचौलिया के वनकागांव में 650 बोरी यूरिया आई। सचिव कन्हैयालाल शर्मा ने बताया कि सोमवार को करीब 100 बोरी वितरित हो चुकी है। तिकुनिया के साधन सहकारी समिति जसनगर में 15 दिनों से यूरिया नहीं है। गोदाम प्रभारी सत्तन ने बताया कि दो-तीन दिन में यूरिया आ जाएगी।
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ममरी और रोशन नगर में 15 दिनों से समस्या
ममरी। साधन सहकारी समिति ममरी और साधन सहकारी समिति रोशन नगर में यूरिया 15 दिनों से नहीं है। ममरी समिति के सचिव अतीक अहमद और रोशन नगर समिति के सचिव दीप सिंह ने बताया कि डिमांड चेक लगी है। इधर, किसान रोजाना समिति के चक्कर लगा रहे हैं। संवाद
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एक-एक बोरी ही दी जा रही
अलीगंज। किसान सेवा सहकारी समिति अलीगंज के प्रबंध निदेशक धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि डीएपी व एनपीके एक सप्ताह से नहीं है। यूरिया 600 बोरी मिली है, जिसका वितरण शुरू हो गया। किसानों को खसरा, खतौनी, आधार कार्ड के साथ एक एकड़ पर एक बोरी 266.50 रुपये में यूरिया दी जा रही। वहीं, किसानों का कहना है कि उन्हें जरूरत ज्यादा की है। अलीगंज समिति में यूरिया के लिए किसानों की लंबी लाइन लगी है। सोमवार को धक्कामुक्की हुई तो पुलिस मौजूदगी में यूरिया का वितरण कराया गया। संवाद
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जुगाड़ वालों को मिल रही खाद
खमरिया। बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति खमरिया में 600 बोरी यूरिया वितरण के लिए आई है तो किसानों की भीड़ जमा हो गई। पकरिया निवासी सचिन कुमार ने बताया कि समिति पर परिचय न होने से खाद नहीं दी गई। बरारी निवासी बेचेलाल ने बताया कि सुबह से खाद के लिए टहल रहे हैं, लेकिन नहीं मिली। जिन लोगों की जुगाड़ है, उनको जल्दी खाद मिल रही है। सचिव राजकिशोर वर्मा से मामले की जानकारी चाही तो वह कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हुए। संवाद
पसगवां में सोमवार को रही बंदी
पसगवां। साधन सहकारी समिति पसगवां सोमवार को बंद रही, जिससे किसानों को यूरिया नहीं मिल सकी। पसगवां और बड़खर समिति के सचिव भाई लाल के पास दोनों जगह का कार्यभार है। वे बड़खर में थे। इस वजह से यहां बंद रही। साधन सहकारी समिति जसमढ़ी जंगबहादुरगंज के रास्ते में अतिक्रमण होने से ट्रक नहीं पहुंच सका, जिससे खाद का संकट है। एडीओ सचिन तिवारी ने कहा कि अधिकांश समितियों में यूरिया है, जिसका नियमानुसार वितरण कराया जा रहा है। संवाद
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निजी दुकानों पर ठगे जा रहे किसान
धौरहरा। क्षेत्र की ज्यादातर समितियों से खाद नहीं है। धौरहरा, जंगलवाली और सुजईकुंड़ा समितियों में यूरिया छह-छह सौ बोरी आई, लेकिन किसानों को एक-एक बोरी ही मिली। वो भी घंटे लाइन में लगने के बाद। किसान निजी दुकानों से 400 रुपये में यूरिया और 1600 रुपये में डीएपी खरीदने के लिए मजबूर हैं। संवाद
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निघासन और सिंगाही क्षेत्र में खाद का संकट
निघासन। कस्बे की क्रय विक्रय समिति में 10 दिनों से यूरिया नहीं है और यहां के सचिव रवि शुक्ला मौजूद नहीं मिले। बी-पैक्स साधन सहकारी समिति निघासन सचिव कौशल चतुर्वेदी ने बताया कि 21 जून तक यूरिया का वितरण एक बोरी प्रति एकड़ के हिसाब से किया गया। सोमवार शाम तक अगला आवंटन आने की उम्मीद है। सिंगाही केनौरंगाबाद बी-पैक्स समिति पर यूरिया का स्टाक खत्म हो गया। खैरीगढ बी-पैक्स सोमवार को मात्र 50 किसानों को यूरिया दी गई।
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ट्रांसपोर्टिंग व्यवस्था फेल
-विभागीय सूत्रों ने बताया कि जिले में खाद है, लेकिन ट्रांसपोर्टिंग व्यवस्था ठीक न होने से समितियों पर खाद नहीं पहुंच पा रही है, जिसके चलते संकट बना है। पिछले साल भी ट्रांसपोर्टिंग व्यवस्था खराब होने से खाद को लेकर हाहाकार मचा था। मामले में कार्रवाई भी की गई थी। इस वर्ष भी वही हाल बना हुआ है। इधर, पीसीएफ के जिला प्रबंधक अतुल चौधरी ने बताया कि समितियों पर लगातार खाद भेजी जा रही है।
कुछ किसान जरूरत से ज्यादा खाद लेकर स्टाक लगा रहे हैं, जिससे कुछ दिक्कतें आ रही हैं। मौजूदा 67 समितियों के सापेक्ष मात्र पांच से छह जगह खाद नहीं है, वहां भेजी जा रही। कुछ समितियों पर खाद खत्म हो चुकी है। सीतापुर से रैक मिलने की उम्मीद है, जिससे संकट खत्म हो जाएगा।
-रजनीश प्रताप सिंह, एआर कोऑपरेटिव