लखीमपुर खीरी। जिले में सड़कों और पुल-पुलियों की बदहाली अब सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए रोजमर्रा का खतरा बन चुकी है। शहर से लेकर गांवों तक लोग जान हथेली पर रखकर सफर करने को मजबूर हैं। कहीं गड्ढों में फंसी बाइकें हैं, तो कहीं टूटी रेलिंग के सहारे जिंदगी टिकी है। हादसे होते हैं, जिंदगियां चली जाती हैं, लेकिन हालात जस के तस बने रहते हैं।
धौरहरा क्षेत्र में हाल ही में हुए दर्दनाक हादसे के बाद जिलेभर में की गई पड़ताल ने व्यवस्था की संवेदनहीन तस्वीर सामने रख दी। मोहम्मदी के शुक्लापुर से सुआताली मोड़ तक सड़क ढलान पर है। कुछ दिन पहले यहीं गन्ने से भरा ट्रक स्कूली बच्चों से भरे वाहन पर पलट गया था। हादसे में बच्चों की जान बाल-बाल बची, लेकिन घटना के बाद भी सड़क की हालत नहीं सुधरी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां हर गुजरता वाहन खतरे से खेलता है, लेकिन लोक निर्माण विभाग ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
धौरहरा के बसंतापुर मार्ग पर टूटी पुलिया और उखड़ी ईंटें मौत को दावत दे रही हैं। इसी पुलिया से टकराकर ऑटो पलटने से तीन मासूमों समेत चार लोगों की जान चली गई थी। हादसे के बाद भी न रेलिंग बदली गई, न सड़क सुधारी गई।
बरबर क्षेत्र का मोहम्मदी-बरबर मार्ग हो या मझगईं कस्बे की जर्जर सड़कें-हर जगह हालात एक जैसे हैं। बारिश में रास्ते कीचड़ बन जाते हैं और आम लोग फिसलते, गिरते आगे बढ़ते हैं। इन्हीं रास्तों से अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी गुजरते हैं, लेकिन पीड़ा किसी फाइल तक नहीं पहुंच पाती।
बेहजम क्षेत्र के अकबरपुर गांव के पास जमुवारी नदी पर बना पुल वर्षों से टूटी रेलिंग के सहारे खड़ा है। कई बाइक सवार यहां नदी में गिर चुके हैं। यह पुल 50 से अधिक गांवों के लोगों के लिए जीवनरेखा है, लेकिन मरम्मत के नाम पर सिर्फ उपेक्षा मिली है। सिकंदराबाद के अमेठी गांव, गोला के बांसगांव–शेरपुर मार्ग और सदर ब्लॉक के शेरपुर–कंधरापुर मार्ग पर हालात और भी भयावह हैं। टूटी पुलिया, धंसी सड़कें और अंधेरे में नजर न आने वाले खतरे रोज किसी नए हादसे को न्योता दे रहे हैं।
बरबर-मोहम्मदी मार्ग का हाल। संवाद
बरबर-मोहम्मदी मार्ग का हाल। संवाद
बरबर-मोहम्मदी मार्ग का हाल। संवाद
बरबर-मोहम्मदी मार्ग का हाल। संवाद
बरबर-मोहम्मदी मार्ग का हाल। संवाद