- डीएम ने संचालक बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव परित कर लगाई रोक
- विधायक और चेयरमैन के हस्तक्षेप पर निकला हल
सरजू सहकारी चीनी मिल के गन्ना क्रय केंद्रों पर किसानों से वाहनों से गन्ना उतरवाई लेने को लेकर ठेकेदारों के बीच चल रहा विवाद रविवार को समाप्त हो गया। संचालक बोर्ड की बैठक में डीएम आकाशदीप ने प्रस्ताव कर गन्ना उतराई किसानों से लेने पर रोक लगा दी है।
चीनी मिल क्षेत्र के गन्ना क्रय केंद्रों पर किसानों से गन्ना उतरवाई के नाम पर 30 रुपये प्रति डनलप और 70 रुपये प्रति ट्रॉली लिया जाता था, जिसका किसानों ने प्रबल विरोध करते हुए सेंटरों पर तोल बंद करवा दी थी, इसको लेकर कई दिनों से गन्ना किसानों और सेंटर ठेकेदारों के बीच विवाद चल रहा था। मामला संज्ञान में आने पर क्षेत्रीय विधायक केजी पटेल और चीनी मिल के उपाध्यक्ष अमनदीप सिंह ने डायरेक्टरों के साथ बैठक कर मिल संचालक बोर्ड के अध्यक्ष/डीएम आकाशदीप से किसानों से गन्ना उतरवाई न लेने की मांग की थी। शनिवार को बूथों का निरीक्षण करने पहुंचे डीएम ने संचालक बोर्ड के साथ बैठक कर गन्ना उतरवाई किसानों से न लेने का प्रस्ताव किया था। रविवार को किसानों ने मिल में एक बैठक की। बैठक में उतरवाई पर रोक लगाने पर विधायक और उपाध्यक्ष समेत संचालक मंडल के सदस्यों का सम्मान किया। इस दौरान चीनी मिल प्रधान प्रबंधक वीएस राजकुमार, सभी बोर्ड संचालक, भंडारी यादव, किसान जसविंदर, छोटे लाल, चंद्रिका यादव, राज बहादुर रामचंद्र, बबलू गुप्ता, रामकिशोर आदि किसान मौजूद रहे।
निघासन। बेलरायां चीनी मिल के क्रय केंद्रों पर गन्ना उतराई को लेकर चीनी मिल उपाध्यक्ष अमनदीप सिंह ने ट्रांसपोर्टरों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि क्रय केंद्रों पर अब किसानों को उतरवाई नहीं देनी पड़ेगी।
बेलरायां चीनी मिल के 36 गन्ना क्रय केंद्रों पर करीब 36 सालों से किसानों से गन्ना उतरवाई ली जाती थी। यही नहीं मजदूर मनमानी राशि भी लेते थे। इसके विरोध में गोविंदर सिंह, विनोद वर्मा समेत कई किसानों ने शुक्रवार को चीनी मिल का घेराव कर जमकर हंगामा किया था। किसानों का उग्र रूप देखकर चीनी मिल कर्मचारियों के हाथ पांव फूल गए थे। सूचना पर पहुंचे चीनी मिल उपाध्यक्ष अमनदीप सिंह ने किसानों को किसी तरह से शांत कराया था। जीएम वीएस राजकुमार ने गन्ना ट्रांसपोर्टरों की एक बैठक बुलाकर बातचीत की। करीब दो घंटे तक लंबी बहस के बाद अमनदीप सिंह ने किसानों से उतरवाई न देने का निर्णय किया। इस निर्णय से किसानों में खुशी हैं।