सहकारी गन्ना विकास समिति की बैठक में वार्षिक सामान्य सभा में कई प्रस्ताव पारित
सहकारी गन्ना विकास समिति की वार्षिक सामान्य सभा में गन्ना मुद्दे पर चीनी मिल अधिकारियों की जमकर खिंचाई की गई और किसानों ने पांच दिसंबर तक भुगतान करने के लिए अल्टीमेटम दे डाला। चीनी मिल अधिकारी किसानों को कोई भी आश्वासन नहीं दे सके। इसके साथ ही बैठक में कई प्रस्ताव भी पारित हुए।
वार्षिक सामान्य सभा की अध्यक्षता अध्यक्ष विकास कपूर ने की। बैठक में किसानों ने सबसे पहले गन्ना डिफर भुगतान का मसला उठाया। जिसमें उन्होंने कहा कि चीनी मिल ने 20 नवंबर तक भुगतान करने को कहा था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। न तो डिफर मिला और न ही तुलवाए गए गन्ने का भुगतान। बैठक में चीनी मिल अधिकारियों की खूब खिंचाई हुई और किसानों ने कहा कि पांच दिसंबर तक भुगतान न हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। किसान प्रतिनिधियों के मुताबिक भुगतान के मसले पर चीनी मिल अधिकारी कोई आश्वासन नहीं दे सके। बैठक में समिति के कर्मियों को 20 प्रतिशत बोनस देने का प्रस्ताव रखा गया। प्रस्ताव पर मुहर गन्ना आयुक्त की स्वीकृति के बाद लगेगी। अगर मुहर लग गई तो कर्मियों को काफी फायदा पहुंचेगा। इस प्रस्ताव से कर्मियों में खासी खुशी देखी गई। घटतोली पर भी विशेष वार्ता हुई और इसे बंद करने को कहा गया। विकास कार्यों पर विशेष जोर दिया गया। बता दें कि यह बैठक वर्ष 2010 के बाद हुई है। बैठक में अन्य तमाम बिंदुओं पर चर्चा हुई और कई प्रस्ताव भी पारित किए गए। बैठक का संचालन विशेष सचिव भगवती प्रसाद श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान उपाध्यक्ष बिंदु मियां, परिषद अध्यक्ष अरुण मौर्या, ब्लाक प्रमुख गुरुप्रीत सिंह जार्जी, पूर्व पालिकाध्यक्ष महमूद हुसैन खां, समिति डायरेक्टर सुखदेव सिंह, गुरदेव सिंह, तरसेम सिंह, रामनरेश, रामपाल, सिराजुददीन समेत तमाम डेलीगेट मौजूद रहे।
प्रस्ताव पर लगी मुहर तो समिति चुनाव में हिस्सा ले सकेंगे थारू
सहकारी गन्ना विकास समिति की वार्षिक बैठक में एक अहम प्रस्ताव भी पेश किया गया। जिसमें थारू क्षेत्रों को समिति क्षेत्र में शामिल किए जाने को कहा गया। इस पर मुहर लगी तो थारू भी समिति चुनावों में हिस्सा ले सकेंगे। बता दें कि अब तक थारू क्षेत्र बेलरायां चीनी मिल क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं हालांकि उनका गन्ना पलिया चीनी मिल को ही आता है। बेलराया क्षेत्र में होने के कारण वह यहां के अधिकृत सदस्य नहीं होते हैं और इसी कारण वे न तो यहां डेलीगेट बन सकते हैं और न ही डायरेक्टर लेकिन प्रस्ताव मंजूर हुआ तो वह यहां के सदस्य बन जाएंगे और चुनाव में हिस्सा लेकर डेलीगेट, डायरेक्टर और अध्यक्ष भी बन सकेंगे।