लखीमपुर खीरी। मंडी में गेहूं के अलावा अन्य तमाम फसलों की खरीदारी की जाती है। आढ़ती खुद के फायदे के चलते फसल की खरीद को लेकर उल्टी बोली लगाते हैं। वर्ष 2018 में किसानों ने आवाज उठाई थी। इसके बाद से सीधी बोली लगाने पर सहमति बनी थी, लेकिन यह नियम कुछ ही महीने चला।
मंडी में किसानों को फसल का अधिक से अधिक मूल्य मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन राजापुर स्थित मंडी में आढ़तिये खुद के मुनाफे के लिए सीधी बोली लगाने के बजाय उल्टी बोली लगाते हैं। इससे सीधा नुकसान किसान का होता है।
उल्टी बोली लगाने का मतलब है कि किसानों को उनकी फसल के लिए उचित दाम नहीं मिल पाता है, जिससे उनकी आय कम हो जाती है और वे कर्ज में डूब जाते हैं। मंडी के सूत्रों के अनुसार, गेहूं, धान और लाही की फसल खरीद के दौरान उल्टी बोली लगाई जाती है। मंडी में सीधी बोली क्यों नहीं होती, इस पर कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। संवाद