लखीमपुर खीरी। सोमवार को आई तेज आंधी और बारिश से धान और गन्ने की फसल को काफी क्षति पहुंची है। इसके अलावा अब दिन में गर्मी और सुबह और रात में हल्की ठंड का अहसास हो रहा है। कोहरे ने भी दस्तक देनी शुरू कर दी है।
मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ पहले ही तीन दिन और मौसम खराब रहने की संभावना जता चुका है। इसके चलते किसान खासे परेशान हैं। जो किसान धान काट चुके थे उनका धान खेतों में पड़ा होने से अब भीग चुका है। जो धान नहीं कट पाया है वह तेज हवा के कारण खेतों में ही गिर गया है। इससे धान की फसल को सबसे ज्यादा क्षति पहुंची है। उधर, तेज आंधी के कारण गन्ने की फसल भी गिर गई है। किसानों का कहना है कि गन्ने की फसल खेतों में गिरने से गन्ने का उत्पादन घट सकता है। गन्ने के सूखने और कीड़ा लगने का भी डर है।
जिला प्रशासन का कहना है कि आंधी-पानी और ओले गिरने से हुई फसलों की क्षति का आंकलन शुरू कराया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद ही फसल नुकसान का पता चल सकेगा। कृषि विज्ञान केंद्र लखीमपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुहैल का कहना है कि गेहूं के लिए तैयार किए जा रहे खेत खराब हो जाने से गेहूं फसल की बोआई भी पिछ़ड़ सकती है।
तेज आंधी से दीवार गिरने से दो बकरियां मरीं
बरवर। तेज आंधी तूफान और बारिश से भौंनापुर निवासी सुरेश कुमार की कच्ची दीवार गिर गई। इससे छप्पर के नीचे बंधीं दो बकरियां दीवार के मलबे में दबने से मर गईं। लेखपाल हरिओम ने मौके पर जाकर जांच रिपोर्ट बनाई। संवाद
मटर और गन्ने की बोआई हुई लेट
मैलानी। बेमाैसम बारिश से मटर और गन्ने की बोआई भी पिछड़ सकती है। लड़ती निवासी अमन मांगट ने बताया कि उनका खेत मटर की बोआई के लिए तैयार था। सोमवार को ही बोआई होनी थी, लेकिन बारिश के चलते नहीं हो सकी। अब दोबारा बोआई के लिए खेत तैयार करने में समय लगेगा। इससे बोआई लेट हो जाएगी। इसी तरह शरदकालीन गन्ने की बोआई भी अब देरी से हो सकेगी। संवाद
धान व उरद की फसल डूबी, खेतों में बिछा गन्ना
मझगईं। सोमवार दोपहर बाद पछुआ तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से खेतों में खड़ी गन्ने की सैकड़ों एकड़ फसल गिर गई। साथ ही खेतों में पड़ी धान और उड़द की फसल भी पानी में डूब गई। इससे किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है।
मंगलवार की सुबह जब किसान खेतों की तरफ गए तो फसलों की हालत देख मायूस हो गए। बारिश से तिकोना फार्म के परमजीत सिंह की दो एकड़ उरद, दस एकड़ गन्ना, ज्ञान सिंह, केवल सिंह, जोगा सिंह, धर्मपाल, ओमप्रकाश नाग, मोहम्मद खान, बरकत अली, चूर्ण सिंह जगदीश यादव आदि के खेतों में कटी पड़ी धान और उरद की फसल डूबी पड़ी है। किसानों ने डीएम से आंधी-पानी में खराब हुई फसल का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है। संवाद
किसान बोले- आंधी-पानी से फसलें से हुईं बर्बाद, चूहे और जानवर भी पहुंचाएं क्षति
कोठिया गांव निवासी किसान सुशील कुमार गौतम ने कहा कि आंधी-पानी में सबकुछ खराब हो गया। गन्ने की फसल गिर गई, जिसको चूहे और अन्य जानवर भी नुकसान पहुंचाएंगे। आंधी पानी से काफी नुकसान हुआ है।
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किसान सोहनदास ने बताया कि इधर-उधर से कर्ज लेकर फसलें बोईं थीं, मगर आंधी-पानी ने सब तहसनहस कर डाला। कहां से कर्ज चुकाएंगे। कहां से बच्चों की परवरिश करेंगे। अब इसकी भी विकट समस्या सामने आ खड़ी हुई है।
किसान जसवंत सिंह ने कहा कि तीन घंटे से अधिक समय तक चली पछुआ हवाओं के साथ बारिश से गन्ने की सैकड़ों एकड़ फसल गिर गई है। इससे काफी नुकसान हुआ है। खेत में कटी पड़ी धान और उरद की फसल पानी में डूब गई है।
किसान गोल्डी गोयल का कहना है कि बेमौसम बारिश से तैयार खड़ी धान और केला की फसल गिरने से काफी नुकसान पहुंचा है। एकाएक बदले मौसम ने किसानों की दिक्कत बढ़ा दी है।
पूरनपुर गांव के किसान सुखराज सिंह ने बताया कि बारिश के साथ चली तेज हवा से फसल पर गहरा असर पड़ा है। धान, केला और गन्ना फसल तेज हवा चलने से गिरकर बर्बाद हो गई।
किसान यदुनंदन सिंह पुजारी का कहना है कि इस समय तेजी से केला और धान की फसल की कटाई का काम चल रहा था। बेमौसम की बारिश और तेज हवा से फसलों को नुकसान हुआ है।
कस्बा निवासी रघुनाथ प्रसाद ने बताया कि केला फसल को पानी बरसने और हवा चलने से काफी नुकसान हुआ है। धान पककर तैयार है। बरसात में फसल भीगने से कटाई का काम अब लेट हो जाएगा।
किसान जसवंत सिंह।
किसान जसवंत सिंह।
किसान जसवंत सिंह।
किसान जसवंत सिंह।
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किसान जसवंत सिंह।
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