लखीमपुर खीरी। सख्ती और कार्रवाई के बाद भी जनपद में पराली जलने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल सबसे ज्यादा घटनाएं हुईं, जबकि पराली प्रबंधन को लेकर लगातार जागरूक किया जाता रहा, फिर भी किसान मानने को तैयार नहींं हैं।
जिले में धान फसल कटाई होते ही कृषि विभाग अलर्ट हो गया है। कृषि, राजस्व और पुलिस ने निगरानी शुरू कर दी। अगर कोई किसान पराली जलाते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पराली की निगरानी सेटेलाइट से भी हो रही है। कृषि विभाग में दर्ज फसल अवशेष जलाने के आंकड़े अगर देखे जाएं तो वर्ष 2024 में 80 मामले पराली जलाने के आए। जबकि 2023 में 65, 2022 में 109, 2021 में 170 और वहीं 2020 में 155 मामले पराली जलाने के सामने आए थे।
उपकृषि निदेशक गिरीश चंद्र ने बताया कि लाउडस्पीकर के माध्यम से गांव-गांव किसानों को जागरूक किया जा रहा है। बेहजम, नीमगांव, अंडू बेहड़, मूड़ा, सेहरुवा, सिकंदराबाद, भीकमपुर, अलीनगर, मोहम्मदी, शुक्लापुर, रेहरिया, मौखीखेड़ा, मूड़ानिजाम, लौकीखेड़ा, पड़री, देवलरिया, उमरपुर, कोरिगवां, मुकद्दरपुर, पिपरिया कप्तान परसड़, इब्राहिमपुर, राजापुर आदि गांवों में फसल अवशेष प्रबंधन का प्रचार किया गया।
बताया कि दो एकड़ से पर पांच हजार, इससे ज्यादा पर 10 व पांच एकड़ 30हजार तक जुर्माना है। किसान पराली, गन्ने की पत्ती व अन्य फसल अवशेष बिल्कुल न जलाएं। फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध है। जुर्माना भी हो सकता है। फसल अवशेष को ऑर्गेनिक कार्बन की बढ़ोतरी के लिए उपयोग में लाएं।