नए साल पर कड़ाके की ठंड के बीच किसान पर्चियां न मिलने पर गन्ना समिति के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं किसानों के लिए चलाई गई गन्ना सूचना प्रणाली सहित सभी योजनाएं फेल नजर आ रही हैं।
किसानों की परेशानियां दूर करने के लिए अधिकारियों ने दो वर्ष पहले गन्ना सूचना प्रणाली, कंट्रोल रूम और गश्ती दल का गठन कर कई योजनाओं की बड़े-बड़े दावों के साथ शुरुआत की थी। ये योजनाएं कागजों में भले ही अच्छी नजर आ रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे जुदा है। अधिकारियों के तमाम दावों के बावजूद किसान पर्ची न मिलने और जमीन के सर्वे को लेकर चक्कर काटने को मजबूर हैं।
पर्ची को लेकर लगभग सभी किसान परेशान हैं। बानगी के तौर पर कुछ लोगों से बात की तो उनका दर्द फूट पड़ा। ये सभी लोग रोज समिति में पर्ची की समस्या को लेकर आते हैं और लौट जाते हैं, किंतु कोई सुनवाई नहीं होती ।
नहीं चढ़ाया जमीन का सर्वे
पर्ची के लिए चक्कर काट रहे महेवागंज के नानकचंद्र बताते हैं कि उनकी चार एकड़ जमीन है। सट्टा बंद हो गया, लेकिन अब तक जमीन का सर्वे नहीं चढ़ाया गया है। बीते कई दिनों से गन्ना समिति के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
क्या कहते हैं परेशान किसान
कालाआम गांव के ओमप्रकाश कहते हैं कि जमीन का सर्वे पूरा हो गया है, लेकिन अब तक एक भी पर्ची नहीं मिल पाई है। पर्ची के लिए बीते एक महीने से परेशान हैं। कोई सुनने वाला नहीं है। इसी तरह कैमहरा गांव से आए किसान सुमेरलाल बताते हैं कि उनकी कुल पांच एकड़ जमीन का सर्वे पूरा हो गया है। अब तक मात्र एक पर्ची मिली है। पर्चियों को लेकर पिछले पच्चीस दिन से रोजाना चक्कर काटने को मजबूर हैं।
क्या कहते हैं अफसर
जिला गन्ना अधिकारी जगदीश प्रसाद यादव के अनुसार मिल ने कैलेंडर जारी किया है, जिसके अनुसार पर्चियां निकाली जा रही हैं। किसानों को दिक्कत को देखते हुए एक-एक आदमी पर ध्यान दिया जा सकता। पर्ची न मिलने की शिकायत अब लगातार कम होती रहेगी, क्योंकि सभी की पर्चियां जारी हो रही हैं।