पलियाकलां। भीरा थाना क्षेत्र की मटैहिया ग्राम पंचायत के बोझवा समेत कई ग्राम पंचायतों के किसान अपनी फसल लाइनपार से लाने के लिए लंबा चक्कर लगाने के लिए मजबूर हैं।
ऐसा इसीलिए है कि बोझवा गांव के पास से रेलवे लाइन पारकर उनके खेत पड़ते हैं। लेकिन, लाइन पार करने पर गड्ढा होने के साथ ही रास्ते की मरम्मत न होने से उसपर पानी भरा हुआ है। इससे ग्रामीण तीन किलोमीटर की दूरी 21 किलोमीटर चलना पड़ता है।
बोझवा, कचनारा, मटैहिया समेत कई ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों व किसानों की खेतिहर भूमि रेलवे लाइन पारकर बरुआ कलां व छोटे बरुआ में पड़ती हैं। बोझवा से होकर लाइनपार कर खेतिहर इलाके में जाने के लिए रास्ता बना हुआ है। पहले रेलवे द्वारा यहां गड्ढा खोदकर रास्ता बंद कर दिया गया था, लेकिन बाद में मनरेगा के जरिये रास्ता बनवाया गया था।
जिस पर से ग्रामीण डनलप व ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिये खेतों से गन्ना व मवेशियों के चारा आदि लेकर आते थे। लेकिन बीते कई माह से रास्ता जर्जर पड़ा है और इसपर गड्ढों के चलते पानी भर गया है।
जिम्मेदारों द्वारा ध्यान न देने और रेलवे की तरफ से उदासीनता बरते जाने के कारण तीन किलोमीटर के बजाय ग्रामीण व किसान 21 किलोमीटर भीरा होकर निकलने को मजबूर हैं।
जिससे उनका समय तो व्यर्थ जा रहा है, साथ ही अधिक धन का भी व्यय हो रहा है। ग्रामीणों ने लाइन पार खेतिहर इलाके में जाने के लिए रास्ते को बनवाने की मांग की है।
पलिया के बोझवा से बरूआ कलां खेतिहर इलाके में जाने वाले रास्ते पर भरा पानी। संवाद
पलिया के बोझवा से बरूआ कलां खेतिहर इलाके में जाने वाले रास्ते पर भरा पानी। संवाद
पलिया के बोझवा से बरूआ कलां खेतिहर इलाके में जाने वाले रास्ते पर भरा पानी। संवाद
पलिया के बोझवा से बरूआ कलां खेतिहर इलाके में जाने वाले रास्ते पर भरा पानी। संवाद