लखीमपुर खीरी। मौजूदा भौतिकवादी युग में संयुक्त परिवार की अवधारणा ही लगभग समाप्त हो गई है। परिवार का मतलब पति, पत्नी और बच्चे ही रह गया है मगर लखीमपुर शहर में एक ऐसा भी परिवार है, जिसमें एक साथ, एक छत के नीचे चार पीढ़ियां रह रही हैं। एक चूल्हे पर खाना बनता है और सब साथ बैठकर खाना खाते है। यह संयुक्त परिवार शहर के एक प्रतिष्ठित व्यापारी का है, जो समाज में मिसाल बना हुआ है।
जिले के प्रतिष्ठित व्यवसायी कृष्ण मोहन अग्रवाल के मेनरोड स्थित घर में छह बेटों का परिवार एक छत के नीचे रहता है। इनमें तीन बेटों की मृत्यु हो चुकी है लेकिन उनकी पत्नियां और बच्चे एक साथ ही रहते हैं। इस समय उनके परिवार में कुल 52 सदस्य हैं। जिनका खाना एक साथ बनता है और सभी एक साथ बैठकर खाना खाते हैं। परिवार के व्यवसायिक साम्राज्य में परिवार के सभी पुरुष सदस्य मिल बांट कर काम करते हैं। उसकी आय संयुक्त परिवार के मुखिया कृष्ण मोहन अग्रवाल के पास आती है। वही घर के संचालन की व्यवस्था करते हैं।
मुखिया के छह बेटों के परिवार हैं साथ-साथ - कृष्ण मोहन अग्रवाल के छह बेटे थे। सोम प्रकाश अग्रवाल, प्रभु प्रकाश अग्रवाल, ज्योति प्रकाश अग्रवाल, प्रह्लाद प्रकाश अग्रवाल, ओम प्रकाश अग्रवाल और प्रेम प्रकाश अग्रवाल थे। इनमें प्रह्लाद प्रकाश अग्रवाल, ओम प्रकाश अग्रवाल और प्रेम प्रकाश अग्रवाल का निधन हो चुका है।
सोम प्रकाश अग्रवाल के दो, प्रभु प्रकाश के तीन और ज्योति प्रकाश अग्रवाल के दो बेटे हैं। उनकी पत्नियां और बच्चे हैं। इसी तरह स्व. प्रह्लाद प्रकाश अग्रवाल के पुत्र सुरेश अग्रवाल के दो बेटे एक बेटी, ओम प्रकाश अग्रवाल के पुत्र रोहित अग्रवाल के भी दो बेटे और एक बेटी है। प्रेम प्रकाश अग्रवाल के पुत्र पुनीत अग्रवाल के तीन बेटे हैं। महिला, पुरुष और बच्चों को मिलाकर कुल 52 लोगों का परिवार हैं।
नन्हे-मुन्ने बच्चों की किलकारियों से गूंजता है घर- परिवार के मुखिया प्रेम प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि चार पीढ़ियों वाला 52 सदस्यीय परिवार एक साथ एक छत के नीचे रह रहा है। सभी सदस्यों के बीच आपसी प्रेम है। कभी किसी काम या आमदनी को लेकर आपस में विवाद नहीं हुआ। सभी एक दूसरे पर विश्वास करते हैं। सभी का खाना एक ही रसोई और एक ही चूल्हे पर बनता है।
दिन में भले ही लोग अलग अलग समय पर खाना खाएं लेकिन शाम के समय सभी सदस्य एक साथ बैठकर खाना खाते हैं। उनका कहना है कि परिवार में कई छोटे बच्चे हैं। दिन भर घर में गूंजती बच्चों की किलकारियों से परिवार का माहौल हमेशा खुशनुमा बना रहता है।