मितौली में लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में संचालित अस्थाई सीओ कार्यालय। संवाद
मितौली। तहसील की स्थापना को दस वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन यहां क्षेत्राधिकारी (सीओ) कार्यालय का स्थायी भवन आज तक नहीं बन पाया। यह कार्यालय अब भी लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में अस्थायी रूप से संचालित है।
इसी भवन में अधिकारी जनता की सुनवाई भी करते हैं। स्थायी भवन न होने से रोजाना न सिर्फ आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, बल्कि पुलिसकर्मियों की कार्यशैली पर भी इसका असर पड़ रहा है।
तहसील मितौली की स्थापना वर्ष 2013 में हुई थी। यहां मौजूदा समय में थाना, तहसील भवन, विकास खंड कार्यालय, विद्युत उपकेंद्र सहित कई सरकारी कार्यालयों की स्थापना हो चुकी है। यहां की लगभग पांच लाख आबादी की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले सीओ को ही कार्यालय नसीब नहीं हो सका है। सीओ कार्यालय पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस में संचालित है।
अधिकारी या पुलिस कार्यालय के अभाव का दर्द तो कभी खुलकर बयां नहीं करते, लेकिन कई बार अपना कार्यालय भवन न होने की टीस उनमें दिखाई देती है।
पुलिस विभाग की उदासीनता का आलम यह कि सीओ को थाने में अस्थायी आवासीय भवन तो उपलब्ध है, लेकिन यहां तैनात कर्मचारियों समेत अन्य स्टाफ को आवास तक नहीं मिला है। ऐसे में उन लोगों को थाने के भवन में रहने की विवशता है।
कार्यालय भवन के लिए भूमि तो आवंटित है। उसके निर्माण के लिए पुलिस मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है। यह प्रक्रिया विचाराधीन है। उस पर निर्णय उच्च स्तर पर लिया जाना है।
-यादवेंद्र, सीओ, मितौली