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अतिक्रमण से सिकुड़ते जा रहे जिले के जंगल

Wed, 03 Jun 2015 08:16 PM IST
लखीमपुर खीरी
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बढ़ती आबादी के दबाव के चलते जंगल भी अतिक्रमण से अछूते नहीं हैं। अवैध कब्जों के कारण जंगल का दायरा सिकुड़ता जा रहा है। जंगलों का क्षेत्रफल कम होने से वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक आवास और भोजन का संकट पैदा हो रहा है। गांवों के आसपास के पुराने बाग तकरीबन कट चुके हैं। उनकी जगह नए बाग नहीं लग रहे हैं। आबादी का बढ़ता दबाव और घटती हरियाली पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
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खीरी जिला प्राकृतिक संपदा के मामले में उत्तर प्रदेश का सबसे समृद्ध जिला है। जिले के कुल क्षेत्रफल 7680 वर्ग किलोमीटर में से 1735 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वनों से आच्छादित है। भले ही यहां तेजी से बागों का विनाश हुआ है लेकिन एग्रो फारेस्टी का विकास एक शुभ संकेत है। यहां लोग खेती के रूप में पापुलर और यूकेलिप्टस के पेड़ लगा रहे हैं। इससे किसानों को कमाई हो रही है तो जिले की हरियाली भी बढ़ रही है।  
जंगल बचाएं कि बढ़ाएं सरकारी राजस्व
वन विभाग के सामने एक तरफ जंगल बचाने की जिम्मेदारी है तो दूसरी तरफ सरकारी राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य। दोनों जिम्मेदारियां एक साथ निभा पाना वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती है। वन विभाग को जंगल की लकड़ी वननिगम को बेचने के अलावा जुर्माना, लाइसेंस वसूली आदि से राजस्व मिलता है। राजस्व बढ़ाने में कहीं न कहीं जंगल को नुकसान ही होता है।
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जंगल की भूमि पर बड़े पैमाने पर हैं अतिक्रमण
खीरी के जंगल अतिक्रमण के कारण सिकुड़ते जा रहे हैं। दक्षिण खीरी वन प्रभाग की एक हजार तो उत्तर खीरी वन प्रभाग की करीब 5000 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण का शिकार है। राजनीतिक दबाव और कोर्ट में लंबित चल रहे मुकदमों के कारण यह भूमि खाली नहीं हो पा रही है।
जंगलों के कम होने से पर्यावरण पर पड़ रहा असर
घटती हरियाली का पर्यावरण पर भारी असर पड़ रहा है। भूमि की जलधारण क्षमता कम होती जा रही है। इससे बाढ़ और कटान की समस्या बढ़ रही है। बारिश कम हो रही है। गर्मी में इजाफा हो रहा है। वन्यजीवों में कमी होने से जिले की जैव विविधता भी प्रभावित हो रही है।
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