गौरतलब है दुधवा में 27 जनवरी को जिप्सी चालक, नेचर गाइडों ने हड़ताल शुरू कर दी थी और इसमें एक दो दिन बाद दुधवा के दैनिक कर्मी भी शामिल हो लिए थे। हड़ताल से पर्यटन ठप हो गया था और फिर डीडी ने सरकारी वाहनों से पर्यटन को शुरू कराया था। हालांकि दो दिन बाद सरकारी वाहनों के चालक भी कर्मचारियों के दबाव में हड़ताल पर चले गए थे। इसी क्रम में फेडरेशन आफ फारेस्ट एसोसिएशन भी हड़ताल में शामिल हो गई और दुधवा के विभागीय कार्य भी बंद हो गए। एफडी संजय सिंह और डीडी पीपी सिंह की कर्मियों को मनाने की मुहिम भी बेकार साबित हुई। बुधवार को फेडरेशन आफ फारेस्ट एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल प्रांतीय पदाधिकारियों से मिलने के लिए रवाना हुआ था जो बृहस्पतिवार को लौट आया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि प्रांतीय पदाधिकारियों से बात हो गई है और वह डीएम के खिलाफ कार्रवाई का एक मांग पत्र मुख्यमंत्री को सौंपेंगे। करीब तीन दिन बाद वह भी यहां आकर आंदोलन में शामिल हो जाएंगे। गुरुवार को दुधवा के कर्मियों, जिप्सी चालकों और गाइडों, दैनिक कर्मचारियों ने कैंपस में ही जुलूस निकला और नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। उन्होंने इस दौरान डीएम पर कार्रवाई की मांग की। आंदोलन के चलते पार्क में पर्यटन ठप रहा और परिसर, हट, कैंटीन सभी सूने रहे। रिसेप्शन पर सन्नाटा पसरा रहा। कुछ इक्का दुक्का सैलानी आए भी तो वह लौट गए।
... तो किया गया धोखा
बुधवार को कई नेचर गाइड और जिप्सी चालकों के हस्ताक्षर वाला व्हाट्सअप पर जारी हुए पत्र को कई जिप्सी चालकों और गाइडों ने धोखा बताया। उनके मुताबिक को यह बात साफ हो गई कि आंदोलन खत्म होने की खबर महज अफवाह भर थी। उन्होंने बताया कि कुछ अपने ही लोगों ने उनसे सादे कागज पर हस्ताक्षर करवाए थे और कहा था कि इसमें मांग लिखकर ऊपर भेजेंगे। जिप्सी चालकों और गाइडों कहा कि यह धोखा था और वह अभी हड़ताल पर हैं। वह पार्क कर्मियों के साथ आंदोलन को और तेज करेंगे।
साजिश कर दी जाएगी नाकाम
फेडरेशन आफ फारेस्ट के पदाधिकारी पतिराज सिंह, रामकुमार आदि ने कहा कि उनके आंदोलन को गतिहीन करने के लिए साजिशें रची जा रही हैं। सब साजिशें नाकाम कर दी जाएंगी। कहा कि धोखे से हस्ताक्षर करवा लेना भी इसी साजिश का हिस्सा था जो नाकाम हो गया।