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Lakhimpur Kheri News: हाथियों को खूब रास आ रही तराई की आबोहवा, पर किसान हो रहे तबाह

Wed, 12 Aug 2026 11:24 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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दुधवा में हाथियों को भोजन कराते एफडी। स्रोत: वन विभाग
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लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। भारत-नेपाल सीमा से सटे दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) की तराई की आबोहवा हाथियों को रास आ रही है, लेकिन जंगल से सटे खेतों में उनकी आवाजाही किसानों के लिए मुसीबत बन रही है। हाथियों के झुंड खेतों में पहुंचकर फसलों को चरने और रौंदने से नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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वर्ष 2023 में तराई एलीफेंट रिजर्व की स्थापना के दौरान दुधवा टाइगर रिजर्व में हुई वैज्ञानिक गणना में 149 जंगली हाथी पाए गए थे। दुधवा में 25 पालतू हाथी भी हैं, जो सैलानियों को जंगल की सैर कराने के साथ पेट्रोलिंग में लगाए जाते हैं। नेपाल से हाथियों के दल हर साल तीन से चार माह के प्रवास के लिए यहां आते हैं।
इन दिनों नेपाल के शुक्लाफांटा नेशनल पार्क से आए दो टस्कर करीब 25 दिन से किशनपुर अभयारण्य में डेरा डाले हैं। पहले से मौजूद हाथियों का एक दल दक्षिण सोनारीपुर रेंज के जंगल में है। ये हाथी मझगईं रेंज से सटे खेतों में पहुंचकर फसलें चरने और रौंदने से नुकसान पहुंचा रहे हैं। बेलरायां, मझगईं और पलिया रेंज के आसपास का क्षेत्र हाथियों से सबसे ज्यादा प्रभावित बताया जा रहा है।
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हाथी रात में जंगल से निकलकर खेतों में पहुंचते हैं। फसलों को बचाने के लिए कई बार किसान खेतों के चारों ओर सौर ऊर्जा चालित करंट वाले तार लगा देते हैं, जो हाथियों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।
वर्ष 2018 में मझगईं रेंज के बौधिया गांव में करंट प्रवाहित तारों से तीन हाथियों की मौत हुई थी। इसी साल 18 जुलाई को उत्तर निघासन रेंज के रघुबर वन ब्लॉक में एचटी लाइन में करंट लगने से जंगली हाथी की मौत हुई थी। 28 जुलाई 2019 को पलिया रेंज के घोला गांव के पास ट्रांसफॉर्मर और 28 सितंबर को बफरजोन की उत्तर निघासन रेंज के खैरटिया गांव में करंट लगने से हाथी की मौत हुई थी। इसके अलावा पिछले 20-25 वर्षों में पांच जंगली हाथियों की ट्रेन से कटकर मौत हो चुकी है।
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प्रचलित कॉरिडोर से आवागमन करते हैं नेपाल के हाथी
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि हाथी संयुक्त परिवार में रहते हैं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं। उनकी याददाश्त बहुत प्रबल होती है। हाथियों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, उनकी जेनेटिक मेमोरी होती है। वे जिन रास्तों से एक बार आवागमन करते हैं, उनकी स्मृति संतानों में भी बनी रहती है और वे उन्हीं रास्तों से आवागमन करते हैं। नेपाल से दुधवा आने वाले हाथियों को भी हर बार एक ही रास्ते से आते-जाते देखा गया है।
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बच्चों को बताए वन्यजीव संरक्षण के उपाय

बिजुआ। विश्व हाथी दिवस पर बुधवार को भीरा रेंज की चक बीट के चक पसियापुर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। क्षेत्रीय वन अधिकारी भीरा रमाकांत सक्सेना के साथ चक एवं पड़रिया बीट का वन स्टाफ मौजूद रहा। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने विद्यार्थियों को हाथियों के प्राकृतिक आवास, पर्यावरण में उनके महत्व और वन्यजीव संरक्षण की जानकारी दी। संवाद
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हाथियों के महत्व पर की चर्चा
पलियाकलां। दुधवा टाइगर रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों में विश्व हाथी दिवस जन-जागरूकता के साथ मनाया गया। मैलानी रेंज के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में क्षेत्रीय वन अधिकारी की अध्यक्षता में कार्यक्रम हुआ। बच्चों को पृथ्वी पर हाथियों के महत्व, उनकी सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। गौरीफंटा रेंज के प्राथमिक विद्यालय कीरतपुर और प्राथमिक विद्यालय बनगवां डिगनिया बीट में भी गोष्ठियां हुईं। इनमें हाथियों के महत्व की जानकारी दी गई। संवाद

विश्व हाथी दिवस पर कला प्रतियोगिता आयोजित
पलियाकलां। विश्व हाथी दिवस पर द नेचर सोसाइटी ने कला प्रतियोगिता आयोजित की। इसमें ग्राम मझगईं के विद्यार्थियों ने उत्साह से प्रतिभाग किया। गौरी कुमारी ने प्रथम और तृष्णा गुप्ता ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार दिए गए। सोसाइटी के अध्यक्ष शेखर श्रीवास्तव ने बताया कि हर साल 12 अगस्त को यह दिवस एशियाई और अफ्रीकी हाथियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। संवाद
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