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Dudhwa: दुधवा में मनाया गया 'दुर्गा' का जन्मदिन, इरशाद ने बच्चे की तरह पाला, मार्मिक है इस हथिनी की कहानी

Mon, 09 Oct 2023 05:11 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

बिजनौर के अमानगढ़ जंगल में अक्टूबर 2018 में शारदीय नवरात्र के दौरान मिली नन्हीं हथिनी दुर्गा अब पांच साल की हो गई है। दुधवा में सोमवार को दुर्गा का जन्मदिन मनाया गया। इस मौके पर दुधवा नेशनल पार्क उपनिदेशक डॉ रंगाराजू टी समेत कई वन अधिकारी मौजूद रहे। 
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हथिनी दुर्गा के साथ महावत इरशाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिजनौर के अमानगढ़ जंगल से लावारिस अवस्था में मिली हथिनी दुर्गा का लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व में पांचवा जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया। यह नवरात्र में नौ अक्टूबर 2018 को दुधवा लाई गई थी। तब से यह दुधवा के हाथियों के साथ पल रही है। 

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सोमवार को दुधवा के सलूकापुर बेस कैंप में हथिनी दुर्गा का जन्मदिन मनाया गया। इसकी देखरेख करने वाले महावत इरशाद ने श्रृंगार किया। फूल-माला पहनाई और भोजन में केला, सेब, पपीता, अमरूद समेत व्यंजन परोसे गए। इस मौके पर दुधवा नेशनल पार्क उपनिदेशक डॉ रंगाराजू टी, रेंजर आरपी सिंह, डिप्टी रेंजर सुरेंद्र कुमार समेत महावतों ने केक काटकर दुर्गा के जन्मदिन की खुशियां मनाईं। एफडी ललित वर्मा ने उसके दीर्घायु होने की कामना की।

बहुत मार्मिक है दुर्गा की कहानी
बिजनौर के अमानगढ़ जंगल से पांच साल पहले दुधवा टाइगर रिजर्व लाई गई नन्हीं हथिनी दुर्गा इंसान और जानवरों के बीच भावुक रिश्ते की बानगी है। दुधवा के हाथी परिवार में शामिल हुई दुर्गा की कहानी बहुत मार्मिक है।

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नौ अक्टूबर 2018 को अमानगढ़ जंगल में दुर्गा जब मिली थी तो उसकी उम्र करीब एक माह थी। अमानगढ़ जंगल में उसके पालन-पोषण का कोई समुचित प्रबंध न था। इस पर दुधवा टाइगर रिजर्व के तत्कालीन एफडी रमेश पांडेय और उपनिदेशक महावीर कौजलगि इसे दुधवा लाए। 

इरशाद करते हैं देखरेख 
शारदीय नवरात्र में आने के कारण वनाधिकारियों ने इसे दुर्गा नाम दिया। दक्षिण सोनारीपुर रेंज में पालतू हाथियों की देखभाल करने वाले इरशाद नाम के महावत को दुर्गा की देखरेख और पालन-पोषण की जिम्मेदारी सौंपी गई। इरशाद ने उसे अपने बच्चे की तरह पाला। उसे दुधवा के पालतू हाथियों के बीच रखा गया ताकि परिवार की कमी दूर की जा सके।
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धीरे-धीरे दुर्गा बड़ी होकर अब पांच साल की हो गई और सबकी लाडली बन गई। उसकी शरारतें सबको भाने लगी। दुधवा में देश-विदेश से आने वाले सैलानियों को गाइडों से जब दुर्गा के बारे में पता चलता है तो उसे देखने और मिलने से खुद को नहीं रोक पाते।
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