- नौ में से आठ एजेंसियों ने बंद की धान खरीद
- किसानों का 287.33 करोड़ रुपये एजेंसियों पर बाकी
एक अक्तूबर से शुरू सरकारी धान खरीद को डेढ़ माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी लक्ष्य के सापेक्ष 7.44 फीसदी धान खरीद हुई है। कुल नौ में से आठ एजेंसियां किसानों का धान नहीं खरीद रहीं हैं। सिर्फ एक एजेंसी ही कुछ दिनों के अंतराल पर धान खरीद कर खानापूर्ति कर रही है। अफसरों की चेतावनियों का भी केंद्र प्रभारियों पर असर नहीं पड़ा है। जबकि खरीद न करने वाले केंद्र प्रभारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
जिले में धान खरीद के लिए नौ एजेंसियों के 97 क्रय केंद्र खोले गए हैं, जिनके माध्यम से प्रदेश सरकार ने एक लाख 64 हजार 240 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है। खरीद की शुरुआत से अब तक धान खरीद पटरी पर नहीं आ सकी है। किसानों में हाहाकार होने पर डीएम और एडीएम ने एजेंसी प्रभारियों के साथ बैठक कर किसानों से धान खरीद में तेजी लाने के निर्देश दिए थे और खरीद न करने वाले केंद्र प्रभारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद स्थिति जस की तस बनी हुई है। पीसीएफ, कर्मचारी कल्याण निगम, यूपी स्टेट एग्रो, एसएफसी, एनसीसीएफ, यूपी कोआपरेटिव यूनियन के क्रय केंद्रों पर पांच दिनों से धान खरीद ठप है, जिसके कारणों के बारे में सस्पेंस बना हुआ है। जबकि 6500 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य होने के बावजूद नैफेड ने अभी खरीद प्रारंभ ही नहीं की है। केंद्रीय पूल की एफसीआई ने 3323 मीट्रिक टन धान खरीदा है। कुल लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 1299 किसानों से 12,227 मीट्रिक टन धान खरीदा जा सका है, तो लक्ष्य का महज 7.44 फीसदी है। धान खरीद बंद कर चुकी एजेंसियों पर किसानों का दो करोड़ 87 लाख 33 हजार रुपये बकाया है।
तो अन्य राज्यों से होगी पीडीएस के चावल की सप्लाई
सरकारी धान खरीद का जिम्मा प्रदेश सरकार की एजेंसियों के पास है, लेकिन चावल का भंडारण केंद्रीय पूल की एजेंसी एफसीआई करती है। इस प्रक्रिया में राइस मिलर्स सेतु की तरह धान की कुटाई कर एफसीआई को चावल की सप्लाई करते हैं। सूत्र बताते हैं कि इस बार सरकारी एजेंसियां लक्ष्य से कहीं अधिक पीछे रह गई हैं, जबकि कमीशन खरीद के तौर पर आढ़तियों को भी शामिल नहीं किया गया है। लिहाजा जिले में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पीडीएस दुकानों पर वितरण के लिए चावल की आपूर्ति करने को अन्य राज्यों से चावल की खेप मंगाई जा सकती है।
धान खरीद की बराबर समीक्षा की जा रही है। जिन केंद्रों पर खरीद बंद है, उन केंद्र प्रभारियों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कौशल देव, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी