लखीमपुर खीरी। ब्रॉडगेज होने के बाद उम्मीद जगी थी कि ट्रेनों में सफर आसान हो जाएगा, लेकिन हुआ इसके उलट। पहले मीटरगेज में जहां 12 जोड़ी ट्रेनें चलती थीं, वहीं अब ब्रॉडगेज में चार जोड़ी ही चल रहीं हैं। बोगियां घटाए जाने से यात्री ट्रेनों में खड़े होकर यात्रा करने को मजबूर हो रहे हैं।
लखनऊ से मैलानी जाने और आने वाली मात्र चार जोड़ी ही ट्रेन हैं। लखनऊ से बरेली के लिए अभी कोई सीधी ट्रेन नहीं है, जबकि लखीमपुर से करीब दो से ढाई हजार यात्रियों का इस मार्ग पर रोजाना आवागमन होता है। अगर लखीमपुर, गोला, मैलानी समेत अन्य स्टेशनों की बात करें तो जिले में करीब 12 से 15 हजार यात्री प्रतिदिन ट्रेनों से सफर करते हैं।
यहां से बड़ी संख्या में टिकट की बिक्री हो रही है। बावजूद इसके रेलवे ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ा रहा, न ही लखनऊ से बरेली तक जाने की सीधी ट्रेन की व्यवस्था कर रहा है। यात्रियों का कहना है कि ब्रॉडगेज बनने पर वह अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि ब्रॉडगेज होने से कोई फायदा नहीं मिला है सिर्फ मालगाड़ियों की संख्या इस लाइन पर बढ़ी है।
इसके अलावा ट्रेनों में बोगियां भी कम लगी हुईं हैं। डालीगंज से मैलानी के लिए जाने वाली मैलानी पैंसेजर में सिर्फ आठ साधारण बोगियां लगी हैं। इस कारण यात्रियों को जगह ही नहीं मिल पाती। ऐसे में उन्हें खड़े होकर सफर करना पड़ता है। आमान परिवर्तन के बाद से पूर्वोत्तर रेलवे ने लखनऊ-मैलानी रूट पर सीमित संख्या में ही ट्रेनें चलाई हैं।
शहर के तमाम व्यापारी व अन्य लोगों का कहना है कि जब छोटी लाइन थी तब 12 ट्रेन जाती और 12 आती थीं। लखनऊ से बरेली तक कई ट्रेनों का संचालन होता था, लेकिन अब बड़ी लाइन है तो सिर्फ मालगाड़ियां ही आती हैं।
लखीमपुर रेलवे स्टेशन पर मंगलवाल को करीब साढ़े 15 सौ टिकटों की बिक्री हुई है। प्रतिदिन लगभग इसी तरह से टिकट बिकते हैं। त्योहारों में यह बिक्री बढ़ जाती है। - नवनीत खत्री, वाणिज्य अधीक्षक लखीमपुर
अभी ट्रेनों की संख्या बढ़ाने को लेकर कोई सूचना नहीं है, जैसे ही इसकी आगे कोई जानकारी आएगी तो बताया जाएगा। - महेश गुप्ता, जनसंपर्क अधिकारी डीआरएम रेलवे
पहले नैनीताल के लिए भी चलती थी ट्रेन
जब जिले में छोटी लाइन थी तब यहां से पूर्व दिशा में लखनऊ, सीतापुर को ट्रेनें जाती थीं। इसके अलावा पश्चिम में पीलीभीत, बरेली, बदायूं, कासगंज, मथुरा और आगरा तक सीधी ट्रेन सेवा होने के साथ ही एक ट्रेन नैनीताल एक्सप्रेस भी चलती थी, जो लखनऊ से चलकर सीतापुर, लखीमपुर, पीलीभीत और बरेली के भोजीपुरा होते हुए उत्तराखंड के किच्छा, पंतनगर और लालकुआं से होकर काठगोदाम तक जाती थी। अब बड़ी रेल लाइन बनने के बाद बरेली के साथ ही मथुरा, आगरा, बदायूं, कासगंज और नैनीताल के लिए कोई सीधी ट्रेन सेवा नहीं है।
ब्रॉडगेज का मतलब ही क्या हुआ जब खाने पड़ रहे धक्के
अगर लखीमपुर से बरेली जाना है तो कोई सीधी ट्रेन नहीं है। आखिर में बस या अन्य साधनों से ही जाना पड़ता है, जबकि पहले अनेक ट्रेन चलती थीं तो ब्रॉडगेज का मतलब ही क्या हुआ जब यात्रियों को धक्के खाने हैं। - आकाश
किसी काम से आए थे अब वापस भोजीपुरा जाना है, लेकिन कोई ट्रेन नहीं है। अगर पीलीभीत तक जाएंगे तो भोजीपुरा और फिर लालकुआ कितने बजे पहुंचेंगे कुछ पता नहीं। - विश्वजीत राय, रुद्रपुर
ब्रॉडगेज बनने के बाद लगा था कि बरेली, आगरा और नैनीताल का सफर आसान हो जाएगा। पहले की तरह ट्रेनें मिल जाएंगी, लेकिन छह साल बाद भी विभाग ट्रेनें नहीं चला पाया है। - अरशद खान, लखीमपुर
जब भी ट्रेन में सफर करना होता है तो खड़े होकर जाना पड़ता है। भीड़ बहुत हो रही है, ट्रेनें कम हैं। ऊपर से साधारण बोगियां भी कम लगी हुईं हैं। इस वजह से दिक्कत है। -बाबूलाल