फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

समिति बोली, सबका सपना है शिव प्रतिमा

Sat, 26 Mar 2016 11:22 PM IST
ब्यूरो/गोला गोकर्णनाथ (खीरी)।
विज्ञापन
मं‌‌दिर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
गोला तीर्थ में शिव प्रतिमा लगाए जाने का मामला
विज्ञापन

हाईकोर्ट में वाद दायर होने के बाद बढ़ी हलचल
पवित्र तीर्थ में भगवान शिव की मूर्ति लगाने के खिलाफ हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में वाद दायर होने के बाद यहां हलचल तेज हो गई है। वाद दायर होने की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद क्षेत्र में काफी चर्चा रही। वहीं प्रतिमा लगाए जाने का समर्थन कर रहे लोगों ने बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। 
बताते चलें, शिव सेवार्थ समिति के तत्वावधान में ऐतिहासिक शिव मंदिर के पास बने तीर्थ में भगवान शिव की 51 फुट की प्रतिमा लगाने के लिए 24 फरवरी को समिति संरक्षक अवनि कुमार पांडेय के हाथों भूमि पूजन हुआ था। इस मौके पर विधायक रोमी साहनी और विनय तिवारी, मधुसूदन गिरि, देवेंद्र गिरि, महेंद्र गिरि, पिंटू वाजपेयी, अध्यक्ष केशव अग्रवाल, घनश्याम अग्रवाल, अवधेश सिंह सहित तमाम प्रमुख लोग मौजूद रहे। इसके बाद मूर्ति लगाने के लिए निर्माण शुरू हो गया था। समिति अध्यक्ष केशव अग्रवाल का कहना है कि होली के कारण काम रुका था, इसे जल्द ही चालू कर दिया जाएगा। 
विज्ञापन

उधर, मूर्ति समर्थकों ने बैठक कर चिंता जताई। मंदिर भगवान शंकर प्रबंध समिति के अध्यक्ष जनार्दन गिरि, तीर्थ जीर्णोद्धार समिति के अध्यक्ष नरसिंह भारती, रोटरी क्लब अध्यक्ष माता प्रसाद केडिया, शिव सेवार्थ समिति के अध्यक्ष केशव अग्रवाल और महामंत्री पप्पी साहनी ने बताया कि तीर्थ में भगवान शिव की प्रतिमा लगने से मंदिर और तीर्थ के सौंदर्य में बढ़ोतरी ही होगी। हरिद्वार में हर की पैड़ी पर 51 फुट की भगवान शिव की मूर्ति लगी है, जबकि शाहजहांपुर की खन्नौत नदी के तट पर भगवान महावीर की 105 फुट की मूर्ति लगी है। इसी तरह यहां भी 51 फुट की मूर्ति और लक्ष्मण झूला का निर्माण शुरू किया गया है। यहां श्रद्धालुओं के लिए यह आकर्षण का केंद्र होने के साथ गोला नगर को अलग पहचान दिलाएगा।
विज्ञापन


शिव प्रतिमा का विरोध निंदनीय
पूर्व विधायक अरविंद गिरि ने कहा है कि तीर्थ में भगवान शिव की 51 फुट की विशाल मूर्ति की स्थापना का कई वर्षों से नगर के प्रबुद्ध लोगों ने सपना संजोया था, लेकिन वह पूरा नहीं हुआ। अब प्रबुद्धजनों के निर्णय पर यह पुण्य काम शुरू हुआ है। यदि इसका कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विरोध करता है तो निंदनीय है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें